17 अप्रैल 2026

ओंकारेश्वर:
मध्य प्रदेश की धर्मनगरी ओंकारेश्वर आज से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव ‘एकात्म पर्व’ की साक्षी बनने जा रही है। 17 अप्रैल से 21 अप्रैल तक चलने वाले इस पांच दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह 9:30 बजे करेंगे। यह आयोजन आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और संस्कृति विभाग द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य के प्रकटोत्सव के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।

क्या है एकात्म पर्व का मुख्य उद्देश्य?
इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य आदि गुरु शंकराचार्य के ‘अद्वैत वेदांत’ के विचार को जन-जन तक पहुंचाना है। आयोजन के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय दर्शन, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

महोत्सव की मुख्य बातें और खास आकर्षण
इस पांच दिवसीय आयोजन में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां और सत्र आयोजित किए जाएंगे:
1. अद्वैत लोक संग्रहालय का निर्माण: ओंकारेश्वर में ‘एकात्म धाम’ के अंतर्गत प्रथम चरण में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊंची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ वननेस) स्थापित की जा चुकी है। अब दूसरे चरण में 2195 करोड़ रुपये की लागत से ‘अद्वैत लोक संग्रहालय’ का निर्माण किया जा रहा है, जिसका अवलोकन मुख्यमंत्री करेंगे।
2. दिग्गज संतों का समागम: कार्यक्रम में द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, रामकृष्ण मिशन के संत और देश-विदेश के प्रख्यात विद्वान शामिल होंगे।
3. विशेष चर्चा सत्र: 19 अप्रैल को ‘अद्वैत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)’ जैसे आधुनिक विषय पर विशेष चर्चा होगी। इसके अलावा वैश्विक शांति, सेवा और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर भी विद्वान अपने विचार रखेंगे।
4. सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: उत्सव के दौरान वैदिक अनुष्ठान, अद्वैत लोक अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

21 अप्रैल को होगा विशेष दीक्षा समारोह
महोत्सव के अंतिम दिन यानी 21 अप्रैल (वैशाख शुक्ल पंचमी) को नर्मदा तट पर एक भव्य दीक्षा समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें देश-विदेश के 700 से अधिक युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में दीक्षा लेंगे। इस दौरान महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज और अन्य प्रमुख संत उपस्थित रहेंगे।

क्यों खास है यह आयोजन?
ओंकारेश्वर आचार्य शंकर की ज्ञान और संन्यास भूमि रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, ये आयोजन केवल धार्मिक नहीं हैं, बल्कि ये विकास और सांस्कृतिक एकता की नींव हैं। ओंकारेश्वर अब अद्वैत दर्शन के माध्यम से सांस्कृतिक एकता का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।
इस आयोजन से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियां अपनी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत से भी रूबरू हो सकेंगी।