कानपुर पुलिस का खुलासा : घर बैठे मनचाही डिग्री बेचने वाला अंतरराज्यीय गिरोह गिरफ्तार
संवाददाता
25 February 2026
अपडेटेड: 2:45 PM 0thGMT+0530
घर बैठे मनचाही डिग्री उपलब्ध
प्रदेश के कानपुर में फर्जी डिग्री और अंकसूची तैयार कर बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह घर बैठे ही विभिन्न विश्वविद्यालयों के नाम पर मनचाही डिग्री उपलब्ध कराता था और देशभर में युवाओं को झांसा देकर मोटी रकम वसूल रहा था।
मास्टरमाइंड समेत छह आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड गिरधारी उर्फ गिरीश को गिरफ्तार किया है। उसके साथ शैलेंद्र कुमार, नागेंद्र मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र,और अश्विनी निगम को भी पकड़ा गया है। गिरोह के प्रत्येक सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी तय थी, कोई डिग्री तैयार करता था तो कोई ग्राहकों से संपर्क और भुगतान की व्यवस्था संभालता था। मामले में पांच अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।
डिग्रियों की तय थी रेट लिस्ट, 50 हजार से 2.5 लाख तक वसूली
गिरोह अलग-अलग कोर्स के हिसाब से रकम वसूलता था। बी-फार्मा और डी-फार्मा की डिग्री के लिए ढाई लाख रुपये, एलएलबी और बीटेक के लिए डेढ़ लाख रुपये, बीए, बीएससी और बीकॉम के लिए 75 हजार रुपये, जबकि इंटर की मार्कशीट के लिए 50 हजार रुपये तक लिए जाते थे।
1000 से ज्यादा फर्जी डिग्री और दस्तावेज बरामद
पुलिस कार्रवाई में गिरोह के पास से 1000 से अधिक फर्जी डिग्रियां, अंकसूचियां, फर्जी माइग्रेशन बुकलेट, डिप्टी रजिस्ट्रार की नकली सील सहित करीब 80 प्रकार के प्रपत्र और दो कार बरामद की गई हैं। बरामद सामग्री से स्पष्ट है कि नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था।
विश्वविद्यालय का बयान, कोई एजेंट अधिकृत नहीं
श्री कृष्ण यूनिवर्सिटी, छतरपुर के रजिस्ट्रार दिगंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय का कोई अधिकृत एजेंट नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस से अधिकृत प्रति मिलने पर संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।
डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगी डिग्रियां, तुरंत हो सकेगी जांच
जालसाजी से बचाव के लिए विश्वविद्यालय की सभी डिग्रियां और अंकसूचियां डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि उनकी प्रमाणिकता की तुरंत जांच की जा सके। अधिकारियों ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या एजेंट के झांसे में न आएं।