काशी में आयोजित सहयोग सम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ‘एक जिला एक उत्पाद मॉडल’ को दिलाएंगे वैश्विक बाजार:
संवाददाता
31 March 2026
अपडेटेड: 7:50 PM 0stGMT+0530
31 मार्च 2026 :
मध्य प्रदेश
मोहन यादव आज 31 मार्च को पहुंचे काशी विश्वनाथ मंदिर:
मुख्यमंत्री मोहन यादव आज 31 मार्च को वाराणसी पहुंचे काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने के बाद विश्वनाथ मंदिर का के कॉरिडोर का अवलोकन किया। वाराणसी पहुंचने पर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नरेंद्र गोपाल गुप्ता नंदी ने उनका भरपूर स्वागत किया। जहां सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचिन खेल और युवा कल्याण मंत्री गिरीश यादव सहित वाराणसी के जनप्रतिनिधि और जिलाधिकारी भी उपस्थित थे मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन कर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण किया और मंदिर परिसर में अधिकारियों के साथ बैठक भी की जहां मंदिर प्रबंधन से जुड़ी कहना अहम जानकारियां साझा की।
काशी विश्वनाथ पहुंचने का उद्देश्य:
मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के वाराणसी काशी पहुंचने का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच हर दिशा में सहयोग को मजबूत करना है उन्होंने मां गंगा के कई तत्वों का अवलोकन किया। मां गंगा की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। मंदिर पर उपस्थित श्रद्धालुओं से बातचीत भी की।
मुख्य फोकस लघु उद्योगों पर रहा:
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में किए गए कार्यों की सराहना की उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार भी मध्य प्रदेश के विकास के लिए कार्यरत है। जिस तरह उत्तर प्रदेश में बनारसी साड़ी प्रसिद्ध है उसी तरह मध्य प्रदेश में चंदेरी और माहेश्वरी साड़ी सहित लघु उद्योगों पर काम हो रहा है।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में बाबा महाकाल लोक बनने के बाद पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बदलाव आया है। जिस तरह से प्रयागराज में कुंभ के दौरान उत्तर प्रदेश की सरकार ने व्यवस्थाएं जमाई । उसी तरह सिंघस्थ के दौरान सभी व्यवस्था ठीक बनी रहे, इसका अध्ययन और भविष्य में क्या किया जा सकता है ,इस योजना पर कार्य किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के ओडीओपी को सिल्वर अवार्ड से राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आज उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में सहयोग सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण मंच पर मध्य प्रदेश के ‘एक जिला एक उत्पाद’ यानी ODOP मॉडल को एक मिसाल के तौर पर पेश कर रहे हैं।
इसमें स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया। इसके जरिए किसानों, कारीगरों, छोटे उद्योगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मध्य प्रदेश के प्रभावी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर अवार्ड 2024 की मान्यता प्राप्त करना। उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग ब्रांडिंग और पैकेजिंग तक का मजबूत इकोसिस्टम बनाना।
जैसे बालाघाट का चिन्नौर चावल, उज्जैन का बाल्टिक, मंदसौर का लहसुन अशोक नगर की चंदेरी साड़ियां सिद्धि के कालीन, ग्वालियर का सेंड स्टोन, बैतूल काश गांव छिंदवाड़ा का संतरा, डिंडोरी – मंडला का कोदो कुटकी और धार का बाघ प्रिंट जैसे 50 से अधिक उत्पादन शामिल करना।
उन्होंने बताया कि प्रदेश की हर जिले की अलग-अलग विशेषता है । जैसे शोरपुर का अमरूद ,भिंड मुरैना की सरसों ,ग्वालियर का सेंडस्टोन ,अशोक नगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, झाबुआ का कड़कनाथ, सीहोर का बासमती, बुरहानपुर की जरी जरदोजी ,सतना का टमाटर ,शहडोल की हल्दी जैसे विविध उत्पादों कोODOP के जरिए संगठित कर बाजार से जोड़ा गया है।
इसमें उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के लिए की टैगिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करना शामिल है।
इस पहले से छोटे किसानों स्थानीय कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों को सीधे बाजार उपलब्ध होगा। जिससे उनकी आय में स्थाई वृद्धि होगी । उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफार्म और जी आई टैगिंग का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के इन समग्र प्रयासों के परिणाम स्वरुप प्रदेश का ओडीओपी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया है । इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश अपने इन्हें अनुभवों को साझा कर रहा है और उत्तर प्रदेश के नवाचारों से भी अवगत हो रहा है। इसमें स्थानीय उत्पादों को केवल प्रदर्शनी तक ही सीमित नहीं रखता है बल्कि उन्हें घर और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचना है।