30 मई 2026
तिरुवनंतपुरम:
केरल में नई सरकार का गठन होने के बाद विधानसभा का पहला सत्र शुरू हुआ है, लेकिन शुरुआत में ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह पूरा मामला तब गरमाया जब राज्यपाल के अभिभाषण (भाषण) से ठीक पहले राष्ट्रगीत का पूरा पाठ नहीं किया गया। इस घटनाक्रम ने राज्य में एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।
क्या है पूरा विवाद और क्यों हुआ हंगामा?
नियमों और परंपरा के मुताबिक, विधानसभा सत्र के दौरान जब राष्ट्रगीत की प्रस्तुति हुई, तो उसका पूरा संस्करण (फुल वर्जन) पेश नहीं किया गया। कार्यक्रम के दौरान बैंड द्वारा वंदे मातरम् की केवल कुछ पंक्तियां ही बजाई गईं। राष्ट्रगीत का पूरा पाठ न होने के कारण विपक्षी दल तुरंत भड़क गए और उन्होंने इस पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की। विपक्ष ने सरकार के इस रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि राष्ट्रगीत को इस तरह आधा-अधूरा बजाना सही नहीं है। इस मुद्दे को लेकर सदन के भीतर सरकार और विपक्ष के नेता आमने-सामने आ गए हैं।
पहले भी उठ चुका है यह मुद्दा
केरल की राजनीति में वंदे मातरम् की प्रस्तुति को लेकर छिड़ा यह विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले जब नई सरकार के मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ था, तब भी वंदे मातरम् की प्रस्तुति को लेकर ऐसा ही विवाद खड़ा हुआ था। उस समय भी विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा था और अब विधानसभा के पहले ही सत्र में दोबारा ऐसा होने से यह विवाद और ज्यादा गहरा गया है।


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