कौन थे अजीत पवार: : कर्मठ प्रशासन और विकासशील दृष्टि के प्रतीक: जनसेवा को समर्पित — अजीत पवार :
संवाददाता
28 January 2026
अपडेटेड: 2:05 PM 0thGMT+0530
अजीत पवार- महाराष्ट्र की राजनीति के पावर मैन:
महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं जो पद से नहीं, बल्कि कार्यशैली, निर्णय क्षमता और जमीनी जुड़ाव से पहचाने जाते हैं। अजीत पवार ऐसा ही एक नाम है। उनका सार्वजनिक जीवन जनसेवा, प्रशासनिक दृढ़ता और विकासोन्मुख सोच का उदाहरण रहा है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनके साथ चार अन्य लोगों की पुणे के बारामती इलाके में विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई।
अजीत पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP के संस्थापक शरद पवार के भतीजे थे ।
आईए जाने कौन थे अजीत पवार:
अजीत पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा नाम था जिसने बीते एक दशक में महाराष्ट्र की राजनीति को एक नया आकार दिया।
उनका जन्म 22 जुलाई 1959 को हुए और वह शरद पवार के भतीजे थे वह पहली बार 1991 में बारामती से सांसद चुने गए थे।
उन्होंने 23 साल की उम्र में ही राजनीति में प्रवेश कर लिया था और इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
1991 में वे पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने और फिर करीब 16 वर्षों तक इस पद को सुशोभित किया यही से उन्होंने संसदीय चुनाव भी जीता।
इसके बाद उन्होंने 1995 में बारामती सीट से विधानसभा का चुनाव जीता और जनता का भरोसा प्राप्त किया और इस सीट से उन्होंने करीब सात बार चुनाव जीत और महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत से स्थापित हो गए।
2010 में पहली बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। इसके बाद वे अलग-अलग सरकारी पदों पर कई विभागों में कार्य किया । उन्होंने वित्त विभाग, सिंचाई विभाग और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग का कार्यभार संभाला।
अजीत पवार की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी जिसने फाइलों से बाहर निकलकर मैदान में काम किया। वे निर्णय लेने में स्पष्ट, कार्यान्वयन में सख्त और परिणामों को लेकर गंभीर माने जाते हैं। राजनीति को उन्होंने केवल सत्ता का साधन नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी के रूप में निभाया।
बारामती मॉडल — विकास की प्रयोगशाला:
बारामती क्षेत्र का विकास उनके सार्वजनिक जीवन का सबसे ठोस उदाहरण है।
यहाँ कृषि, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे में जो परिवर्तन दिखाई देता है, वह दीर्घकालिक योजना और सतत निगरानी का परिणाम है। बारामती को अक्सर एक मॉडल क्षेत्र के रूप में देखा जाता है, जहाँ स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीतियाँ ज़मीन पर उतारी गईं।
वित्त और प्रशासन जैसे जटिल विभागों में अजीत पवार की पकड़ हमेशा चर्चित रही।
राज्य के बजट, संसाधनों के वितरण और योजनाओं के क्रियान्वयन में उन्होंने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया। उनकी सोच में संतुलन रहा — विकास भी हो और वित्तीय अनुशासन भी बना रहे।
जल संसाधन और कृषि पर विशेष फोकस:
महाराष्ट्र जैसे राज्य में पानी और किसान सबसे बड़ी चुनौती हैं।
अजीत पवार ने जल संसाधन प्रबंधन, सिंचाई परियोजनाओं और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी। उनका मानना रहा कि कृषि सशक्त होगी तभी ग्रामीण भारत सशक्त होगा। इसी सोच के तहत कई योजनाएँ आगे बढ़ीं।
सहकारिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था:
सहकारिता आंदोलन से जुड़ाव उनके राजनीतिक जीवन की नींव रहा।
उन्होंने सहकारी संस्थाओं को केवल आर्थिक इकाई नहीं, बल्कि सामूहिक सशक्तिकरण का माध्यम माना। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर बने।
स्पष्टवादिता और कार्यसंस्कृति:
अजीत पवार की कार्यशैली में स्पष्टवादिता रही — वे बातों को घुमा-फिराकर कहने के बजाय सीधे रखते हैं। यही गुण उन्हें समर्थकों के बीच भरोसेमंद और प्रशासन में प्रभावी बनाता है। उनका मानना रहा कि नेतृत्व का मूल्यांकन भाषणों से नहीं, परिणामों से होना चाहिए।
जनसेवा के प्रति समर्पण:
राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद उनका जुड़ाव आम जनता की समस्याओं से बना रहा।
चाहे वह किसान हो, ग्रामीण परिवार हों या शहरी मध्यम वर्ग — उनकी नीतियों और निर्णयों में जनहित की झलक मिलती है।
समर्पित नमन:
जनसेवा, प्रशासनिक दृढ़ता और विकासशील सोच के प्रतीक के रूप में अजीत पवार का योगदान महाराष्ट्र के सार्वजनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण अध्याय है।