गैस के गहराते संकट से हाईवे पर स्थित ढाबों पर पसरा सन्नाटा: ढाबा संचालकों  के सामने कारोबार बंद करने की आई नौबत:

khabar pradhan

संवाददाता

17 March 2026

अपडेटेड: 7:59 PM 0thGMT+0530

गैस के गहराते संकट से हाईवे पर स्थित ढाबों पर पसरा सन्नाटा: ढाबा संचालकों  के सामने कारोबार बंद करने की आई नौबत:


17 मार्च 2026:
मध्य प्रदेश

कमर्शियल एलपीजी की किल्लत से ढाबा संचालकों की बढ़ी मुसीबत
राजधानी के बाहरी इलाकों और प्रमुख हाईवे पर कमर्शियल एलपीजी की भारी किल्लत से अब ढाबा संचालकों के सामने कारोबार बंद करने की नौबत आ गई है।
सबसे बड़ा असर उन डिशेज पर पड़ रहा है जो सीधे तवे पर तैयार होती है। सिलेंडर की कीमत आसमान छूने से अब ढाबा संचालक मेन्यू छोटा करने और कामगारों की छंटनी करने को मजबूर है। गैस सप्लाई चैन टूटने से ढाबे वाले केवल तंदूर के भरोसे चल रहे हैं क्योंकि तंदूर को चलाने के लिए लकड़ी या कोयले का इस्तेमाल किया जा सकता है । फिलहाल ग्राहकों को केवल तंदूरी रोटी के साथ ही भोजन दिया जा सकता है।  होशंगाबाद रोड, मिसरोद और रायसेन रोड के ढाबों पर शाम ढलते ही सन्नाटा दिखने लगा है।
ढाबा संचालकों की बढ़ी परेशानी:
हाईवे के ढाबा संचालक के अनुसार गैस न होने से उनका 60% बिजनेस ठप हो गया है । 15 कर्मचारियों के स्टाफ को संभालना भारी पड़ रहा है। भोपाल जबलपुर हाईवे पर ढाबा चलाने वाले एक संचालक का कहना है कि जो सिलेंडर 1800 में मिलता था,अब वही ब्लैक मार्केट में वह 4500 रुपए तक का मिल रहा है। ट्रकर्स यूनियन ने राज्य सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है।
ड्राइवर्स को भी नहीं मिल रहा रास्ते में भोजन:
यूनियन का कहना है कि ड्राइवर को रास्ते में खाना नहीं मिल रहा और जहां मिल रहा है ,वहां कीमतें काफी बढ़ गई  है। इधर ढाबा संचालकों का कहना है कि  शादियों के सीजन में आमतौर पर ऐसी स्थिति बनती है लेकिन इस बार  बेमौसम की किल्लत ने रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सीधा नुकसान पहुंचाया है।

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