चित्रकूट में मिली 500  पांडुलिपियों में भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी का वर्णन देख विशेषज्ञ हैरान

khabar pradhan

संवाददाता

10 April 2026

अपडेटेड: 3:13 PM 0thGMT+0530

चित्रकूट में मिली 500  पांडुलिपियों में भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी का वर्णन देख विशेषज्ञ हैरान

10 अप्रैल 2026
सतना / चित्रकूट:
धार्मिक नगरी चित्रकूट एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक विरासत को लेकर चर्चा में है। संस्कृति मंत्रालय के ‘ज्ञान भारत मिशन’ के तहत किए गए एक सर्वे में यहाँ 500 से अधिक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन पांडुलिपियां (Manuscripts) मिली हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ पांडुलिपियों में हिंदू देवी-देवताओं और महापुरुषों का वर्णन उर्दू लिपि में किया गया है।

उर्दू में श्रीकृष्ण का कालिया मर्दन
सर्वेक्षण के दौरान मिली इन पांडुलिपियों में से कुछ उर्दू भाषा में लिखी गई हैं। इनमें एक बेहद खास पांडुलिपि मिली है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ‘कालिया नाग’ का मर्दन करने के दृश्य का चित्रण है। साथ ही, इसी लिपि में भगवान गणेश और गोस्वामी तुलसीदास जी का भी उल्लेख मिलता है। यह इस बात का बड़ा प्रमाण है कि प्राचीन काल में भारतीय संस्कृति और कला किसी एक भाषा या लिपि तक सीमित नहीं थी।

डिजिटल इंडिया से जुड़ेंगी प्राचीन यादें
चित्रकूट के ‘तुलसी शोध संस्थान’ में ऐसी 350 पांडुलिपियां जमा कराई गई हैं। भारत सरकार ने अब इन अनमोल धरोहरों को सुरक्षित करने का बीड़ा उठाया है। अगले तीन महीनों के भीतर इन सभी पांडुलिपियों को ‘डिजिटलाइज’ (Digitalize) किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि दुनिया भर के शोधकर्ता और आम लोग इन्हें कंप्यूटर या मोबाइल पर आसानी से देख और पढ़ सकेंगे।

महाभारत और रामायण काल के भी अंश
तुलसी शोध संस्थान के प्रबंधक ओम प्रकाश पटेल ने बताया कि इन दस्तावेजों में महाभारत और रामायण कालीन पांडुलिपियों के भी कुछ अंश मिले हैं। इनमें देवनागरी लिपि में अंकित रामचरितमानस की हस्तलिखित प्रतियां और ‘पोथी सतनाम’ के नाम से प्रसिद्ध उर्दू पांडुलिपि भी शामिल है। पोथी सतनाम में मंगलाचरण, दोहा और चौपाइयों के साथ भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी के चित्रों को बहुत खूबसूरती से उकेरा गया है।

क्या है सरकार का अभियान?
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने देशभर में ‘ज्ञान भारत मिशन’ शुरू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और प्राचीन दस्तावेजों को खोजना, उनकी पहचान करना और उन्हें सुरक्षित (Document) करना है। यह अभियान 16 मार्च से शुरू हुआ है और तीन महीने तक चलेगा।
क्षेत्राधिकारी चंद्रमौली त्रिपाठी के अनुसार, सरकार एक विशेष  ऐप’ भी तैयार कर रही है। इस ऐप पर इन दुर्लभ पांडुलिपियों के फोटो अपलोड किए जाएंगे ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी गौरवशाली संस्कृति और इतिहास को करीब से समझ सके। फिलहाल इन पांडुलिपियों के अर्थ और इनके कालखंड को और गहराई से समझने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

App में लॉगिन करके फोटो अपलोड कर सकते हैं

संस्कृति मंत्रालय दिल्ली के संस्कृत स्तोत्र एवं प्रशिक्षण केंद्र के क्षेत्राधिकार चंद्र मौली त्रिपाठी ने बताया कि पहले चरण में ज्ञान भारतम app को आम जनमानस के लिए खोल दिया गया हैl

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