जासूसी रैकेट के खुलासे के बाद देश अलर्ट, CCTV नेटवर्क की होगी सख्त जांच

khabar pradhan

संवाददाता

24 March 2026

अपडेटेड: 1:14 PM 0thGMT+0530

24 मार्च 2026

राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पाकिस्तान से जुड़े जासूसी रैकेट के खुलासे के बाद देशभर में हड़कंप मच गया है। जांच में सामने आया है कि संवेदनशील स्थानों पर सोलर पावर से चलने वाले गुप्त कैमरे लगाए गए थे, जिनके जरिए लाइव फुटेज सीमा पार भेजी जा रही थी।

इस खुलासे के बाद अब देशभर में CCTV नेटवर्क की व्यापक सुरक्षा जांच शुरू की जा रही है। इसे हाल के सबसे बड़े सुरक्षा रिव्यू में माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला गृह मंत्रालय ने आईबी और मल्टी एजेंसी समन्वय के तहत लिया है।

नई व्यवस्था के तहत 1 अप्रैल से केवल वही CCTV कैमरे बाजार में बेचे जा सकेंगे, जिनके पास अनिवार्य सरकारी सर्टिफिकेशन होगा। इसके लिए कैमरों की जांच सरकारी लैब में की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें हैक नहीं किया जा सकता।

सरकार का उद्देश्य सुरक्षा खामियों को दूर करना और संवेदनशील स्थानों की निगरानी को और मजबूत बनाना है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


CCTV कैमरे बन सकते हैं खतरा! आपकी प्राइवेसी और देश की सुरक्षा दोनों पर मंडरा रहा जोखिम


क्या आपके घर, गली या मोहल्ले में CCTV कैमरा लगा है या आप लगवाने की सोच रहे हैं? तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। असुरक्षित CCTV कैमरे न सिर्फ आपकी प्राइवेसी बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कैमरे सुरक्षित नहीं हैं तो उन्हें आसानी से हैक किया जा सकता है और उनकी लाइव फीड कहीं भी भेजी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय उदाहरण में देखा गया कि युद्ध के दौरान ट्रैफिक कैमरों के जरिए सैन्य गतिविधियों की जानकारी हासिल की गई।

भारत में भी स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है। अनुमान है कि देश में लगभग 80% CCTV कैमरे विदेशी (खासतौर पर चीनी) कंपनियों के हैं, जिनसे डेटा चोरी या निगरानी का खतरा बना रहता है।

एक मामले में सोनीपत रेलवे स्टेशन पर बाहरी व्यक्ति ने निगरानी प्रणाली में सेंध लगाकर न सिर्फ कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की, बल्कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों की तस्वीरें भी बिना अनुमति रिकॉर्ड कर लीं। बाद में इन क्लिप्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया गया, जो सीधे तौर पर निजता का उल्लंघन है।

कानूनी रूप से भी यह गंभीर मामला है। साल 2023 के डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत किसी भी व्यक्ति की पहचान उजागर करने वाली फुटेज का गलत इस्तेमाल अपराध माना जाता है।

इसलिए जरूरी है कि CCTV कैमरे लगाते समय उनकी सुरक्षा, सर्टिफिकेशन और डेटा प्रोटेक्शन का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि आपकी प्राइवेसी सुरक्षित रह सके।


गाजियाबाद जासूसी कांड: गुप्त कैमरों से पाकिस्तान भेजी जा रही थी लाइव फीड

हाल ही में सामने आए जासूसी मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। खुलासा हुआ है कि गुप्त कैमरों के जरिए संवेदनशील इलाकों और सुरक्षा से जुड़े मूवमेंट की लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी।

जांच में पाया गया कि ये कैमरे इंटरनेट के माध्यम से विदेशी सर्वरों से जुड़े हुए थे, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा में बड़ी सेंध लगने का खतरा पैदा हो गया था। यह नेटवर्क गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में एक बीट कांस्टेबल की सूचना के बाद उजागर हुआ।

मामले में नाबालिगों और महिलाओं की संलिप्तता भी सामने आई है। अब तक 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि देशभर में अलग-अलग एजेंसियों द्वारा कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन इनके लिए कोई एकीकृत डेटाबेस या स्पष्ट नियंत्रण प्रणाली मौजूद नहीं है। यही बड़ी खामी अब सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार CCTV नेटवर्क को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। संभावित सुधारों में यूनिक रजिस्ट्रेशन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, मजबूत साइबर सुरक्षा मानक और एकीकृत राष्ट्रीय नेटवर्क प्रोटोकॉल लागू किया जा सकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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