24 अप्रैल 2026
वाशिंग्टन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने कट्टरपंथी लेखक माइकल सैवेज की एक पोस्ट शेयर की, जिसमें भारत और चीन को ‘नरक का द्वार’ बताया गया है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है और भारत सरकार ने इस पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
क्या था उस विवादास्पद पोस्ट में?
अमेरिकी लेखक माइकल सैवेज ने अपनी पोस्ट में कैलिफोर्निया के तकनीकी क्षेत्र (Tech Sector) का जिक्र करते हुए भारत और चीन के लोगों पर निशाना साधा था। पोस्ट में कहा गया कि:
* कैलिफोर्निया की कंपनियों में अब केवल भारत और चीन के लोगों का दबदबा है।
* वहां का माहौल ऐसा हो गया है कि स्थानीय लोगों के लिए नौकरी पाना मुश्किल हो गया है।
* लेखक ने यह भी तर्क दिया कि जन्म के आधार पर नागरिकता देने वाले ‘बर्थराइट कानून’ की समीक्षा होनी चाहिए।
डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल इस पोस्ट को शेयर किया, बल्कि ‘विविधता’ और ‘प्रवासन’ को लेकर सैवेज के विचारों का समर्थन भी किया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
भारत सरकार का जवाब: “यह सोच गलत है”
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को इस मामले पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
* भारत ने ट्रंप द्वारा शेयर किए गए वीडियो और बयानों को देखा है।
* किसी देश के विकास में योगदान देने वाले पेशेवरों के बारे में ऐसी टिप्पणी करना अनुचित है।
* यह कहना कि भारतीय पेशेवरों की वजह से वहां की स्थिति ‘नरक’ जैसी हो गई है, पूरी तरह से गलत और निराधार है।
नागरिकता कानून पर छिड़ी बहस
इस विवाद के केंद्र में अमेरिका का वह कानून भी है जो वहां जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः नागरिकता देता है। ट्रंप और सैवेज जैसे विचारकों का मानना है कि:
1. प्रवासियों को नागरिकता देने का फैसला अदालतों के बजाय देशव्यापी मतदान से होना चाहिए।
2. नए प्रवासी अमेरिकी संस्कृति में घुलने-मिलने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाए रख रहे हैं, जिससे देश की एकता प्रभावित हो रही है।
3. ‘बर्थराइट सिटीजनशिप’ के कारण लोग केवल नागरिकता पाने के लिए अमेरिका आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के समय इस तरह के बयान ध्रुवीकरण पैदा करने के लिए दिए जाते हैं। हालांकि, भारत जैसे मित्र राष्ट्र के खिलाफ इस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल करना दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों के लिए ठीक नहीं माना जा रहा है। सिलिकॉन वैली और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों का जो योगदान है, उसे पूरी दुनिया जानती है, ऐसे में ट्रंप का यह रुख कई सवाल खड़े करता है।


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