फर्जी कॉल से लोगों को निशाना, राजधानी में बढ़े मामले।
भोपाल समेत प्रदेश में इन दिनों साइबर ठग नए तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखा रहे हैं और लाखों रुपये ठग रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करने की अपील की है।
कॉल स्पूफिंग से असली नंबर जैसा दिखाते हैं कॉल।
साइबर अपराधी तकनीकी सॉफ्टवेयर और इंटरनेट कॉलिंग के जरिए अपने नंबर को असली जैसा दिखाते हैं। मोबाइल स्क्रीन पर कभी बैंक, कभी पुलिस स्टेशन या जांच एजेंसी का नंबर दिखाई देता है, जिससे लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं और जाल में फंस जाते हैं।
डर और दबाव बनाकर कराते हैं ट्रांजैक्शन।
ठग पहले मनी लॉन्ड्रिंग, केवाईसी या किसी अपराध में नाम आने का डर दिखाते हैं। इसके बाद तुरंत कार्रवाई, गिरफ्तारी या जांच का हवाला देकर लोगों को मानसिक दबाव में डालते हैं और जल्दबाजी में रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लेते हैं।
पहले केस में महिला से 31.60 लाख रुपये ठगे।
अहमद नगर निवासी उर्मिला शुक्ला को 1 दिसंबर को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 31.60 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और रकम कई खातों में जमा करवा ली।
दूसरे केस में बुजुर्ग को बनाया निशाना।
ई-7 अरेरा कॉलोनी निवासी 79 वर्षीय राजेंद्र कुमार दुबे को एटीएस और एनआईए अधिकारी बनकर फोन किया गया। मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर उनसे 57.20 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।
अंतरराष्ट्रीय नंबरों की जगह अब लोकल नंबर का इस्तेमाल।
विशेषज्ञों के अनुसार पहले इस तरह के कॉल विदेशी नंबरों से आते थे, जिन्हें पहचानना आसान था। अब ठग स्थानीय या परिचित संस्थानों के नंबर दिखाकर भरोसा जीत रहे हैं।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव, पुलिस की अपील।
पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि कोई भी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। ऐसे कॉल आने पर तुरंत फोन काटें और साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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