तालिबान के कानून पर भारत में सख्त संदेश, हिंसा और कट्टरता पर कड़ा रुख जरूरी

khabar pradhan

संवाददाता

20 February 2026

अपडेटेड: 3:36 PM 0thGMT+0530

तालिबान के कानून पर भारत में सख्त संदेश, हिंसा और कट्टरता पर कड़ा रुख जरूरी

अफगानिस्तान में तालिबान की नीतियों को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चिंता जताई जा रही है और भारत में भी इस पर सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। स्पष्ट कहा गया है कि पिटाई, डर और हिंसा से समाज नहीं चलता, बल्कि इससे कट्टरता और अस्थिरता ही बढ़ती है।

तालिबान ने घरेलू हिंसा को वैध बताने वाला कानून पेश किया है l तालिबान के कानून में कहा गया है कि घरेलू हिंसा तब तक वैध है, जब तक  महिला की हड्डियां ना टूटी हो l तालिबान की नई 90 पेज की दंड संहिता ने 2009 की महिलाओं के खिलाफ हिंसा उन्मूलन कानून को समाप्त कर दिया है l तालिबान ने नया फैसला जारी किया है, अगर कोई विवाहित महिला अपने पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने जाती है तो उसे 3 महीने तक की जेल भी हो सकती है l इसके अलावा महिलाओं को जज के सामने अपनी चोटें खोलकर दिखानी होगी , उसके साथ उसका पति या कोई पुरुष साथी भी अदालत में मौजूद होना अनिवार्य है l

महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर तालिबान की सोच पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। कहा गया है कि महिलाओं को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करना न केवल अमानवीय है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के भी खिलाफ है। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वतंत्रता से दूर रखना किसी भी समाज के विकास को रोक देता है।

पत्नी को प्रताड़ित करने या हिंसा करने को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता। कानून का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है, न कि उन्हें डर के माहौल में रखना। भारत में भी घरेलू हिंसा के खिलाफ सख्त प्रावधान हैं और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला है।

महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कई कानूनी विकल्प मौजूद हैं, जिनमें घरेलू हिंसा अधिनियम, आपराधिक कानून और अन्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं। पीड़ित महिलाएं पुलिस, अदालत या महिला आयोग की मदद लेकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती हैं।

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