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26 मई 2026:
खबर प्रधान डेस्क:
नई दिल्ली/
ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग ने तेल और गैस के बीच जबरदस्त संकट उत्पन्न किया है। इस संकट के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आ रही है।  दरअसल भारत और खाड़ी देश ओमान के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता किया गया है जो 1 जून 2026 से लागू हो रहा है।
इस समझौते की सबसे खास बात यह है कि खाड़ी देश ओमान होर्मुज के दायरे से बाहर है और यह भारत के लिए एक नया कॉरिडोर खोल सकता है। जिससे होर्मुज स्ट्रीट से उत्पन्न संकट से निपटने के लिए यह एक बेहतरीन और मददगार रास्ता साबित हो सकता है।
भारत और ओमान के बीच क्या है एग्रीमेंट:
दरअसल भारत और ओमान के बीच 18 दिसंबर 2025 को एक एग्रीमेंट किया गया था जो कंप्रिहेंसिव इकोनामिक पार्टनरशिप CEPA हुआ था। यह एग्रीमेंट अब 1 जून से प्रभावित हो जाएगा । भारत में पिछले कुछ समय से ओमान के अलावा और भी कई अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया था।  जिससे इस समझौते से दोनों ही देश को एक दूसरे के बाजार में बिना टैरिफ के अपना सामान बेच  सकेंगे। और सबसे खास बात यह है कि ओमान हार्मुज के दायरे से बाहर है।  जिससे बिना बाधा के कारोबार किया जा सकता है।
इस मुक्त व्यापार समझौते के तहत ओमान भारत के 98.08 सामानों पर टैरिफ ख़त्म किया है । इससे भारत का ओमान में किए जाने वाला 99.38 फीसदी  एक्सपोर्ट पूरी तरह से टैरिफ फ्री हो जाएगा‌  जिससे भारत का लगभग पूरा ही निर्यात टैरिफ फ्री हो सकता है। किंतु कुछ संवेदनशील सेक्टर जैसे डेयरी प्रोडक्ट चॉकलेट और ज्वेलरी सेक्टर को इस एफडीए यानी टैरिफ से बाहर रखा गया है।

आईए जानते हैं ओमान के इस आवाजाही से भारत में क्या फर्क आ सकता है।
इस समझौते के तहत ओमान ट्रेड कॉरिडोर खुलने से हार्मुज पर निर्भरता कम होगी।  जिससे पेट्रोकेमिकल्स सहित कई सामान को ओमान के रास्ते आयात और निर्यात किया जा सकेगा।  इससे  भारत को व्यापार के लिए एक नया रास्ता मिलेगा और भारत के साथ संबंध बेहतर होने के साथ-साथ व्यापार और नए कॉरिडोर को खोलने में भी मदद मिलेगी।
इस कॉरिडोर के खुलने से भारत खाड़ी देशों अफ्रीका और यूरोप को अपना सामान भेज भी सकता है और वहां से सामान मंगवा भी सकता है। यानी आयात और निर्यात दोनों आसान हो जाएंगे।


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