30 अप्रैल 2026
दतिया:
मध्य प्रदेश की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले दतिया विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। दतिया सीट से पूर्व विधायक रहे राजेंद्र भारती को मिली सजा के बाद यह सीट खाली मानी जा रही है। कानूनी नियमों के अनुसार, अब यहां 2 अक्टूबर से पहले उपचुनाव कराया जाना अनिवार्य है। इस बीच पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं।
दरअसल कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को आर्थिक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में कोर्ट ने तीन साल की जेल की सजा सुनाई है। सजा के एलान के साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई और वे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिए गए।
हालांकि, राजेंद्र भारती ने निचली अदालत के इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन फिलहाल उन्हें वहां से कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख तय की है। कानून के जानकारों का मानना है कि उपचुनाव को केवल तभी टाला जा सकता है जब हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट राजेंद्र भारती की सजा पर रोक लगा दे, जिसकी संभावना अभी कम नजर आ रही है।
नरोत्तम मिश्रा पर भाजपा खेल सकती है दांव
दतिया सीट पर उपचुनाव की खबरों के बीच भाजपा खेमे में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी एक बार फिर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। हाल ही में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने नरोत्तम मिश्रा के निवास पर पहुंचकर लंबी चर्चा की है, जिसे चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
बता दें कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा 2008 से 2023 तक लगातार तीन बार दतिया का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पिछले चुनाव में राजेंद्र भारती ने उन्हें बेहद करीबी मुकाबले में हराया था, लेकिन अब बदले हुए समीकरणों में भाजपा अपनी इस पारंपरिक सीट को वापस पाने की पूरी कोशिश में है।
क्या कहता है नियम?
किसी भी विधानसभा सीट के रिक्त होने पर चुनाव आयोग को छह महीने के भीतर वहां उपचुनाव कराना होता है। दतिया सीट 2 अप्रैल से रिक्त मानी गई है, इस लिहाज से 2 अक्टूबर तक निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। विधानसभा सचिवालय ने भी उपचुनाव की तैयारियों के संबंध में निर्वाचन आयोग को पत्र भेज दिया है।
राजेंद्र भारती के लिए कानूनी लड़ाई जारी
राजेंद्र भारती की टीम फिलहाल कानूनी रास्ते तलाश रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत तो दी है, लेकिन उनकी दोषसिद्धि (Conviction) पर रोक नहीं लगाई है। जब तक दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगती, वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। चूंकि अगली सुनवाई 29 जुलाई को है, तब तक चुनाव की तारीखों का एलान होने की पूरी संभावना है।
दतिया की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब कोर्ट के फैसले और चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।


Leave a Reply