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22 मई 202

नई दिल्ली:


दिल्ली और एनसीआर के ट्रांसपोर्ट कारोबारियों द्वारा शुरू की गई तीन दिनों की हड़ताल का असर अब मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में भी साफ दिखाई देने लगा है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के बुलावे पर की जा रही इस हड़ताल के कारण ग्वालियर में हलचल तेज हो गई है। आंदोलन की वजह से शहर में आने-जाने वाले लगभग 300 ट्रकों के पहिये पूरी तरह थम गए हैं।
हालांकि, आंदोलन के पहले दिन यानी गुरुवार को स्थानीय बाजारों में इसका बहुत ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। लेकिन व्यापारियों और जानकारों का कहना है कि अगर ट्रकों का आना-जाना इसी तरह बंद रहा, तो शुक्रवार से जरूरी सामानों की सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

फल और सब्जियों के दाम बढ़ने की आशंका
इस चक्काजाम की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी फल और सब्जियों की सप्लाई में आ सकती है। आशंका जताई जा रही है कि अगर बाहर से आने वाली गाड़ियां नहीं रुकीं, तो आने वाले दिनों में फल और सब्जियों के दाम काफी बढ़ सकते हैं, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा बोझ पड़ेगा।
ट्रांसपोर्ट कारोबारी सुनील माहेश्वरी के मुताबिक, दिल्ली सरकार द्वारा कमर्शियल गाड़ियों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क में बढ़ोतरी करने, बीएस-4 गाड़ियों पर लगाए गए प्रतिबंध और लगातार बढ़ती ईंधन की कीमतों के विरोध में यह आंदोलन किया जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि इन बढ़ते खर्चों ने ट्रांसपोर्ट बिजनेस की कमर तोड़ दी है और उनके पास विरोध करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

कई जरूरी चीजों पर पड़ेगा सीधा असर
ग्वालियर-चंचल क्षेत्र में किराना सामान, रेडीमेड कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीजें ज्यादातर दिल्ली से ही आती हैं। इसके साथ ही इस पूरे इलाके से तेल और दूसरी जरूरी चीजें दिल्ली भेजी जाती हैं। हड़ताल की वजह से अगले तीन-चार दिनों तक ट्रकों के न चलने से ये सारा सामान रास्ते में ही अटक जाएगा। इसका सीधा असर न सिर्फ स्थानीय बाजारों पर पड़ेगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी माल की किल्लत हो सकती है। फैक्ट्रियों और उद्योगों के लिए आने वाला कच्चा माल भी नहीं पहुंच पाएगा, जिससे पूरा बिजनेस चक्र प्रभावित होने का खतरा है।

ट्रांसपोर्ट नगर में पसरा सन्नाटा
ट्रकों की आवाजाही पूरी तरह बंद होने के कारण गुरुवार को ग्वालियर के ट्रांसपोर्ट नगर में बिल्कुल सन्नाटा पसरा रहा। दिनभर यहां कामकाज ठप रहा और सिर्फ रात के समय शहर के हाईवे पर कुछ बाहरी गाड़ियां ही बेहद कम संख्या में दिखाई दीं। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को जल्द ही नहीं माना गया, तो इस आंदोलन को और ज्यादा उग्र और बड़ा किया जाएगा।


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