दिल्ली में 300 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले गैंग का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
संवाददाता
6 April 2026
अपडेटेड: 1:13 PM 0thGMT+0530
6 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
आजकल डिजिटल दुनिया में ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे बड़े गिरोह को दबोचा है जिसने देशभर के लोगों की नींद उड़ा रखी थी। पुलिस ने 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी करने वाले इस गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है।
कैसे पकड़ा गया गिरोह का मुख्य आरोपी?
क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त सूचना और टेक्निकल जांच के आधार पर कोलकाता से करण कजारिया नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि करण ही इस पूरे नेटवर्क का दिमाग था। वह अलग-अलग राज्यों में फैले इस गिरोह को ऑपरेट कर रहा था। पुलिस ने इसके पास से भारी मात्रा में मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई बैंक दस्तावेज बरामद किए हैं।
ठगी का तरीका: मोटा मुनाफा और फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कीम
यह गैंग लोगों को अपनी जाल में फंसाने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाता था:
ये लोगों को सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए संपर्क करते थे।
उन्हें एक ‘फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कीम’ का लालच दिया जाता था और वादा किया जाता था कि थोड़े ही समय में उनका पैसा दोगुना या उससे ज्यादा हो जाएगा।
भरोसा जीतने के लिए ये एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप इंस्टॉल करवाते थे, जहाँ यूजर को अपना बढ़ता हुआ मुनाफा दिखता था, लेकिन हकीकत में वह पैसा ठगों के पास जा रहा था।
कंबोडिया तक फैले हैं गिरोह के तार
जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वो ये कि इस गैंग का कनेक्शन विदेशों से भी है।
पुलिस के मुताबिक, ये गिरोह कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों के संपर्क में था।
करण कजारिया फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में शेल कंपनियां खोलता था और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था।
अब तक ऐसी 100 से ज्यादा फर्जी कंपनियों और 260 से ज्यादा बैंक खातों की पहचान हो चुकी है। इन खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसे को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
एक शिकायत ने खोला राज
इस बड़े मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने 31.45 लाख रुपये की धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जब पुलिस ने पैसों के ट्रेल (लेन-देन) का पीछा किया, तो कड़ियां जुड़ती गईं और पुलिस इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह तक पहुँच गई।
पुलिस द्वारा की गई बरामदगी:
48 मोबाइल फोन, 258 सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड और चेकबुक, 4 लैपटॉप और जरूरी दस्तावेज
पुलिस ने अब तक करीब 19 लाख रुपये की राशि को फ्रीज भी करवा दिया है।
सावधान रहें!
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप या ‘रातों-रात अमीर बनाने’ वाली स्कीम के झांसे में न आएं। किसी भी ऐप में पैसा लगाने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच जरूर करें।
ऐप्स की जांच करें: गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर के बाहर से कोई भी ‘ट्रेडिंग’ या ‘इन्वेस्टमेंट’ ऐप डाउनलोड न करें।
निजी जानकारी: अपना ओटीपी (OTP), बैंक पासवर्ड या पिन कभी किसी के साथ शेयर न करें, चाहे सामने वाला खुद को बैंक अधिकारी ही क्यों न बताए।
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें या ncrp.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।