5 जून 2026: खबर प्रधान डेस्क:
भारतीय शेयर बाजार से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दुनिया भर में चल रहे तनाव और अनिश्चितता के बीच, भारतीय बाजार में एक नया कॉपोरेट घोटाला सामने आया है। इस बार बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) के निशाने पर आई है देश की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी और ज्वेलरी बिजनेस की दिग्गज कंपनी, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL)। बेंगलुरु की इस मशहूर कंपनी पर सेबी ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
सेबी ने 3 जून 2026 को एक बड़ा कदम उठाते हुए 109 पन्नों का एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इस आदेश में कंपनी के साथ-साथ इसके प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) राजेश मेहता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सेबी ने साल 2020 से 2024 के बीच यानी अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक के चार सालों के खातों की गहराई से जांच की। जांच के बाद सेबी ने दावा किया है कि इस दौरान कंपनी ने अपनी कमाई को गलत तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।
सेबी के मुताबिक, यह हेरफेर करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये की आय (Income) से जुड़ा है। नियामक का कहना है कि कंपनी ने न सिर्फ वित्तीय गड़बड़ियां कीं, बल्कि जांच में सहयोग भी नहीं किया। हालात यह हैं कि सेबी ने कंपनी की कुल कमाई के लगभग 99.8 प्रतिशत हिस्से पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस खबर के आते ही शेयर बाजार में हड़कंप मच गया और राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर 4.99 प्रतिशत तक टूट गए।
विदेशी कंपनियों के जरिए हेरफेर का शक
सेबी की जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों (Subsidiaries), खासकर स्विट्जरलैंड स्थित ‘वैल्कम्बी’ के जरिए वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया। कंपनी ने अपनी आय में इस स्विस कंपनी के योगदान को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था। लेकिन जब वित्तीय रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच की गई, तो पता चला कि असल योगदान 0.5 प्रतिशत से भी कम था।
यह पूरी जांच मार्च 2024 में एक शेयरहोल्डर से मिली शिकायत के बाद शुरू हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने बड़े पैमाने पर ऐसी रकम को अपनी बैलेंस शीट में दिखाया है जो असल में दो साल से अधिक समय से वसूली ही नहीं हुई थी। इसके बाद सेबी ने एक फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया और दो साल की गहन जांच के बाद यह अंतरिम रिपोर्ट जारी की।
कंपनी ने आरोपों को बताया गलत, दी ये सफाई
दूसरी तरफ, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने सेबी के इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि सेबी का यह आदेश अंतरिम है, कोई आखिरी फैसला नहीं है। कंपनी के मुताबिक, उन्होंने अपनी आय को बिल्कुल सही तरीके से दिखाया है और कोई भी गड़बड़ी नहीं की गई है।
कंपनी ने सफाई देते हुए कहा कि सेबी की टीम सूचनाओं को सही तरीके से समझ नहीं पाई है, जिसकी वजह से यह गलतफहमी हुई है। कंपनी ने यह भी कहा कि वे इस मामले में सेबी को हर जरूरी जानकारी और स्पष्टीकरण दे रहे हैं।
कंपनी का इतिहास:
राजेश एक्सपोर्ट्स भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के गोल्ड बिजनेस में एक जाना-माना नाम है। इस कंपनी की शुरुआत साल 1995 में हुई थी और तब यह महज 106 करोड़ रुपये के टर्नओवर के साथ बाजार में लिस्टेड हुई थी। यह देश की उन शुरुआती कंपनियों में से एक है जिसने सोने के कारोबार को संगठित और बड़े पैमाने पर शुरू किया था। अब देखना यह होगा कि सेबी की इस कार्रवाई के बाद कंपनी आने वाले दिनों में खुद को कैसे बेकसूर साबित करती है।


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