नए श्रम कानून के विरोध में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन, भोपाल में 50 करोड़ की अर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित

khabar pradhan

संवाददाता

13 February 2026

अपडेटेड: 2:52 PM 0thGMT+0530

नए श्रम कानून के विरोध में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन, भोपाल में 50 करोड़ की अर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित



केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए श्रम कानूनों के विरोध में बुधवार को राजधानी भोपाल में विभिन्न संगठनों द्वारा हड़ताल की गई। इस हड़ताल का असर बैंक, बीमा, डाकघर और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर देखने को मिला। अधिकारियों के अनुसार हड़ताल के कारण शहर में लगभग 50 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ।

हड़ताल में बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ बीमा और डाक विभाग के कर्मचारियों ने भी भाग लिया। राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में प्रदर्शन किए गए और कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।

रेल कर्मचारियों ने भी किया प्रदर्शन

भोपाल में रेलवे कर्मचारियों ने भी भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने डीआरएम कार्यालय के सामने एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और रैली निकाली। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नए श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग की।

बैंकों में कामकाज रहा प्रभावित

हड़ताल के चलते कई बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहा। हालांकि कुछ शाखाओं में कर्मचारियों ने हड़ताल से दूरी बनाए रखी, लेकिन अधिकांश स्थानों पर सेवाएं बाधित रहीं। ग्राहकों को नकद निकासी, जमा और अन्य बैंकिंग कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारी संगठनों की मुख्य मांगों में चार नए श्रम कानूनों को रद्द करना प्रमुख रहा। इसके अलावा कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने और 1 जनवरी 2026 से 8वा वेतन आयोग लागू करने की मांग भी उठाई।

संगठनों ने यह भी मांग की कि आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को समाप्त किया जाए तथा समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किया जाए।

शहर में अलग-अलग स्थानों पर रैली

शहर में पंजाब नेशनल बैंक की शाखा के सामने कर्मचारियों ने एकत्र होकर प्रदर्शन किया। वहीं, अन्य कर्मचारी संगठनों ने कलेक्ट्रेट तक रैली निकालकर ज्ञापन सौंपा।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संगठनों ने कहा कि यदि सरकार ने श्रमिकों के हित में फैसले नहीं लिए तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। उनका कहना है कि नए श्रम कानून कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

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