5 जून 2026: खबर प्रधानडेस्क:
नीट पेपर लीक मामले की लापरवाही अब देश के भविष्य और होनहार बच्चों की जान पर भारी पड़ने लगी है. पेपर रद्द होने और दोबारा परीक्षा के तनाव के बीच एक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. मध्य प्रदेश के मऊगंज की रहने वाली 20 साल की होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी उर्फ स्नेहा ने नागपुर में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी है. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. इससे पहले राजस्थान, गोवा और दिल्ली के छात्र भी इस तनाव में आत्मघाती कदम उठा चुके हैं.
किताब में मिला भावुक सुसाइड नोट
आकांक्षा ने 20 मई को नागपुर में अपने कमरे में यह कदम उठाया था. शुरुआत में पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था, जिससे परिवार वाले इस आत्मघाती कदम की वजह नहीं समझ पा रहे थे. लेकिन कुछ दिन बाद जब परिजन आकांक्षा की किताबों और पढ़ाई के सामान को देख रहे थे, तो उन्हें एक किताब के अंदर से उसका हाथ से लिखा हुआ सुसाइड नोट मिला. इसके बाद परिजनों ने यह नोट नागपुर की अंबाझरी थाना पुलिस को सौंप दिया है.
सुसाइड नोट में लिखा दर्द: ‘मम्मी-पापा मैंने सब बर्बाद कर दिया’
आकांक्षा ने सुसाइड नोट में अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए अपना पूरा दर्द बयां किया है. उसने लिखा:
“मम्मी-पापा, आपका मुझ पर भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लेगी और डॉक्टर बन जाएगी, पर दोबारा नीट देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर. पहले नीट के पेपर में मेरे अच्छे मार्क्स आ रहे थे, पर अब दोबारा पेपर अच्छा जाए, इसकी क्या गारंटी है! सारी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया, आप दोनों का.” – स्नेहा
परीक्षा में 720 में से 650 नंबर आने की थी उम्मीद
परिजनों के अनुसार, आकांक्षा पढ़ाई में बहुत होनहार थी और उसे नीट परीक्षा में 720 में से 650 अंक मिलने की पूरी उम्मीद थी. गत 3 मई को जब वह परीक्षा देकर लौटी थी, तो उसने खुशी-खुशी अपने पिता से कहा था कि पापा, आपकी बेटी अब डॉक्टर बनेगी, मेरा पेपर बहुत अच्छा गया है. लेकिन कुछ ही समय बाद जब पेपर लीक होने और 12 मई को परीक्षा निरस्त होने की खबर आई, तो उसे गहरा मानसिक आघात लगा. उसे लगा कि उसकी मेहनत और प्रतिभा के साथ धोखा हुआ है. इसके बाद से उसने खाना-पीना छोड़ दिया था और खुद को परिवार से अलग-थलग कर लिया था.
बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए पिता ने लिया था कर्ज, करते थे 18 घंटे काम
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी एक किसान परिवार से हैं और उनके पास गांव में बहुत कम जमीन है. घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड से करीब तीन लाख रुपये का कर्ज लिया और कुछ रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिए. बेटी की बेहतर पढ़ाई के लिए वे पूरे परिवार के साथ नागपुर शिफ्ट हो गए, जहां कृष्ण कुमार ने एक रसोइया (कुक) के रूप में काम करना शुरू किया. हृदय रोगी होने के बावजूद वे रोजाना 18-18 घंटे कड़ी मेहनत करते थे, ताकि उनकी बेटी का सपना सच हो सके.
राहुल गांधी ने पोस्ट कर कहा: शिक्षा व्यवस्था बर्बाद हो चुकी है
इस दुखद घटना पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सरकार और व्यवस्था पर निशाना साधते हुए लिखा, “आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी. एक पिता जो कर सकता था, उसने सब किया. फिर नीट पेपर लीक हुआ और परीक्षा रद्द हुई. उस अनिश्चितता में आकांक्षा हमें छोड़कर चली गई. आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि एक भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था की देन है. शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जिसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है.”
संसदीय समिति ने अधिकारियों को किया तलब
नीट-यूजी पेपर लीक मामले के तूल पकड़ने के बाद अब संसदीय समितियां भी सक्रिय हो गई हैं. शिक्षा और आश्वासन मामलों से जुड़ी समितियों के बाद, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव की अगुआई वाली स्वास्थ्य से जुड़ी संसदीय समिति ने कड़ा रुख अपनाया है. इस समिति ने नीट मामले पर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), स्वास्थ्य सचिव और शिक्षा मंत्रालय के उच्च अधिकारियों को 10 जून को तलब किया है. वहीं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने भी 10 जून को ही जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों को हाजिर होने का आदेश दिया है. गौरतलब है कि एनटीए ने नीट-यूजी की परीक्षा 21 जून को दोबारा कराने की घोषणा की है और इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं.


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