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6 June 2026: खबर प्रधान डेस्क:

पेपर लीक की घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार अब मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए होने वाली नीट-यूजी परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पुख्ता तरीके से कराने की बड़ी कवायद में जुट गई है। 21 जून को दोबारा होने वाली इस परीक्षा के लिए सरकार अब किसी भी तरह की चूक का मौका नहीं छोड़ना चाहती। इसी कड़ी में अब प्रश्न-पत्रों को बजट छापने वाली बेहद सुरक्षित और अति-गोपनीय प्रिंटिंग प्रेस में छपवाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जो वित्त मंत्रालय के परिसर में ही स्थित है। ऐसा होने से पेपर लीक की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।
आइए विस्तार से जानते हैं कि परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए क्या-क्या बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:

वायुसेना के विमानों से भेजे जा सकते हैं प्रश्न-पत्र
प्रश्न-पत्रों को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए सरकार अपने खुद के संसाधनों का इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है। इसके लिए पहले ही वायुसेना के विमानों के उपयोग पर चर्चा हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों प्रश्न-पत्रों के सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन को लेकर रक्षा मंत्रालय के साथ भी बातचीत की गई थी, जिसमें प्रश्न-पत्रों को वायुसेना के विमानों से पहुंचाने की बात सामने आई थी। देश में मौजूदा समय में परीक्षा माफिया जिस तरह सक्रिय हैं, उसे देखते हुए सरकार किसी भी तरह का जोखिम मोल नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि पूरी परीक्षा को सरकारी तंत्र की देखरेख में ही कराने की तैयारी है।

राज्यों से मांगी मदद, मिला सहयोग का भरोसा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने इस परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित माहौल में कराने के लिए सभी राज्यों के साथ बैठक की है और उनसे आवश्यक मदद मांगी है। इस पर सभी राज्यों ने पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। आपको बता दें कि अभी तक नीट-यूजी के प्रश्न-पत्रों की छपाई एनटीए किसी प्राइवेट या व्यावसायिक प्रिंटिंग प्रेस से कराती रही है, लेकिन अब सुरक्षा को देखते हुए इस व्यवस्था को बदला जा रहा है।

सरकार ने लिया सवा महीने में दोबारा परीक्षा कराने का फैसला
सूत्रों के अनुसार, नीट जैसी बड़ी परीक्षा को आयोजित कराने में सामान्य तौर पर लगभग छह महीने का समय लगता है। इसके बावजूद, पेपर लीक की घटना के तुरंत बाद सरकार ने छात्रों के हित को सर्वोपरि रखते हुए महज सवा महीने के भीतर फिर से परीक्षा कराने का बड़ा निर्णय लिया है। इस कदम को पुख्ता करने के लिए केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और शिक्षा मंत्रालय को पूरा सहयोग देने के लिए कहा है। इसके बाद वित्त मंत्रालय से भी संपर्क साधा गया है ताकि प्रश्न-पत्रों की छपाई पूरी तरह सुरक्षित तरीके से हो सके।

दिग्विजय सिंह ने पीएम को पत्र लिखकर की श्वेत-पत्र लाने की मांग
इसी मामले में राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने मांग की है कि सरकार पिछले आठ सालों में एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुए पेपर लीक या अनियमितताओं और उन पर की गई कार्रवाई का पूरा विवरण देते हुए एक श्वेत-पत्र (White Paper) जारी करे। दिग्विजय सिंह, जो शिक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने लिखा कि नीट-यूजी रद्द होने से लाखों छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ा है। छात्रों का भरोसा फिर से जगाने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए यह श्वेत-पत्र बेहद जरूरी है। इस श्वेत-पत्र में पेपर लीक के हर मामले में गिरफ्तार लोगों के नाम, जांच की स्थिति, आरोप-पत्र या क्लोजर रिपोर्ट की पूरी जानकारी शामिल होनी चाहिए।


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