पप्पू यादव का BJP पर तंज: ‘बिहार में नीतीश के बिना BJP की कोई हैसियत नहीं,

khabar pradhan

संवाददाता

22 April 2025

अपडेटेड: 1:42 PM 0ndGMT+0530

PK बिहार के एजेंडे में नहीं’

जन अधिकार पार्टी (JAP) के नेता और पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिना BJP की कोई राजनीतिक हैसियत नहीं है। पप्पू यादव ने यह भी दावा किया कि BJP ने बिहार में कभी अकेले दम पर कोई बड़ा चुनावी प्रदर्शन नहीं किया। साथ ही, उन्होंने प्रशांत किशोर (PK) पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बिहार के राजनीतिक एजेंडे में कहीं नहीं ठहरते। यह बयान पप्पू यादव ने पटना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दिया।
पप्पू यादव का बयान
पप्पू यादव ने कहा, “BJP बिहार में नीतीश कुमार की बैसाखी के बिना कुछ नहीं है। 2015 में BJP ने अकेले चुनाव लड़ा था, तब उसे कितनी सीटें मिली थीं? मात्र 53। बिहार की जनता BJP को नीतीश के साथ ही वोट देती है, अकेले नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) के साथ गठबंधन के बिना BJP का बिहार में कोई आधार नहीं है।
पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर पर भी तंज कसा, जो हाल ही में अपनी ‘जन सुराज’ यात्रा के जरिए बिहार में राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। यादव ने कहा, “PK बिहार के एजेंडे में नहीं हैं। वह बाहर से आकर बिहार की समस्याओं को नहीं समझ सकते। बिहार की जनता को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य चाहिए, न कि बाहरी लोगों के भाषण।”
राजनीतिक पृष्ठभूमि
पप्पू यादव का यह बयान बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले की सियासी हलचल के बीच आया है। नीतीश कुमार और BJP का गठबंधन (NDA) बिहार में सत्ता में है, लेकिन हाल के महीनों में दोनों दलों के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। X पर कई पोस्ट्स में दावा किया गया है कि नीतीश कुमार का BJP के साथ गठबंधन मुश्किल में है, हालांकि केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने हाल ही में कहा कि “नीतीश और BJP का 20 साल का साथ दिल का साथ है और यह आगे भी बना रहेगा।”
वहीं, प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ यात्रा ने बिहार में नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है। किशोर ने दावा किया है कि वह बिहार में एक नया राजनीतिक विकल्प पेश करेंगे, लेकिन पप्पू यादव जैसे नेताओं का मानना है कि किशोर का प्रभाव सीमित रहेगा।
BJP और नीतीश का गठबंधन
पप्पू यादव ने अपने बयान में 2015 के विधानसभा चुनाव का जिक्र किया, जब BJP ने नीतीश के बिना चुनाव लड़ा और केवल 53 सीटें जीतीं, जबकि नीतीश की JDU और राजद-कांग्रेस गठबंधन ने 178 सीटों पर कब्जा किया था। इसके बाद 2017 में नीतीश ने BJP के साथ फिर गठबंधन किया, और 2020 के चुनाव में NDA ने 125 सीटें जीतकर सरकार बनाई। X पर कुछ यूजर्स ने भी इस बात को दोहराया कि “बिना नीतीश के BJP बिहार में सरकार नहीं बना सकती।”
हालांकि, BJP समर्थकों का कहना है कि पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार में 12 सीटें जीतीं, जो उसकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है। फिर भी, नीतीश की JDU ने भी 12 सीटें जीतीं, जिससे यह स्पष्ट है कि NDA की जीत में नीतीश का योगदान अहम रहा।
प्रतिक्रियाएं
पप्पू यादव के बयान पर BJP ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बिहार BJP के प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा, “पप्पू यादव का बयान उनकी राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। BJP बिहार में एक मजबूत पार्टी है और नीतीश जी के साथ हमारा गठबंधन जनता के लिए विकास का प्रतीक है।”
कांग्रेस और राजद ने पप्पू यादव के बयान का समर्थन किया। राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “पप्पू यादव ने सच बोला। BJP बिहार में नीतीश के बिना कुछ नहीं है। जनता नीतीश के काम को वोट देती है, न कि BJP की नीतियों को।”
सोशल मीडिया पर बहस
X पर इस बयान ने तीखी बहस छेड़ दी है। एक यूजर ने लिखा, “पप्पू यादव ने BJP की सच्चाई सामने रख दी। नीतीश के बिना BJP बिहार में शून्य है।” वहीं, एक अन्य यूजर ने BJP का बचाव करते हुए कहा, “BJP ने नीतीश के साथ मिलकर बिहार में विकास किया है। पप्पू यादव सिर्फ विवाद पैदा करना चाहते हैं।”
पप्पू यादव का राजनीतिक सफर
पप्पू यादव, जिनका असली नाम राजेश रंजन है, बिहार की सियासत में एक चर्चित चेहरा रहे हैं। वह कई बार सांसद रह चुके हैं और पूर्णिया में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। हाल के वर्षों में उन्होंने अपनी पार्टी JAP के जरिए स्वतंत्र राजनीति की है, लेकिन वह विपक्षी गठबंधन के साथ भी तालमेल रखते हैं। उनके बयान अक्सर बिहार की सियासत में हलचल मचाते हैं।
आगे की दिशा
पप्पू यादव का यह बयान बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले NDA के लिए चुनौती बन सकता है। नीतीश कुमार और BJP के बीच गठबंधन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं, और विपक्ष इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ यात्रा को लेकर भी चर्चा तेज है, लेकिन पप्पू यादव जैसे नेताओं का मानना है कि बिहार की सियासत में स्थानीय मुद्दे और नेतृत्व ही निर्णायक होंगे।

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