15 June 2020
नई दिल्ली
लंबे समय से तनाव झेल रहे पश्चिम एशिया से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते का मसौदा यानी एमओयू तैयार हो गया है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, तेल प्रतिबंधों में छूट, फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरू मध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनने की खबर है।
ईरान ने इस समझौते के तहत बिल्कुल साफ कर दिया है कि वह न तो कोई परमाणु हथियार खुद बनाएगा और न ही किसी दूसरे देश से इसे हासिल करने की कोशिश करेगा। समाचार एजेंसी रायटर के मुताबिक, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के लिए राजी हो गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि ईरान अब यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) को आगे नहीं बढ़ाएगा और न ही नए परमाणु केंद्रों का विस्तार करेगा। इस पूरे मसौदे के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है, जिसके दौरान परमाणु मुद्दे पर बहुत बारीकी से चर्चा करके अंतिम समझौते का पूरा खाका तैयार कर लिया जाएगा।
हस्ताक्षर होते ही खुल जाएगा होर्मुज जलडमरू मध्य
इस समझौते की सबसे बड़ी शर्त यह है कि जैसे ही दोनों देश इस पर हस्ताक्षर करेंगे, ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरू मध्य को सभी देशों के व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन के लिए खोल देगा। आपको बता दें कि यह रूट दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत ज्यादा अहम माना जाता है। इसके बदले में अमेरिका भी ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों में ढील देते हुए ईरानी बंदरगाहों पर की गई आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटा लेगा।
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होंगे शुरुआती हस्ताक्षर
खबरों की मानें तो अमेरिका और ईरान के बीच इस समझौते पर सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक माध्यम यानी डिजिटल तरीके से हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके बाद दोनों पक्षों के बड़े अधिकारियों और प्रतिनिधियों की मौजूदगी में करीब एक सप्ताह बाद यूरोप में एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह आयोजित होने की उम्मीद है। अमेरिकी पक्ष ने रविवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर बात की है और कहा है कि वे ईरान के साथ इस समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
दूसरी तरफ, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी का दावा है कि तेहरान ने अभी इस समझौते के मसौदे पर दस्तखत करने का आखिरी फैसला नहीं लिया है। ईरान के नीति-निर्धारक और विशेषज्ञ अभी इस समझौते के राजनीतिक, कानूनी और तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच कर रहे हैं। ईरान की कुछ प्रमुख शर्तों में लेबनान पर हो रहे इजरायली हमलों को रुकवाना भी शामिल है। हालांकि, लेबनान की राजधानी बेरूत पर रविवार को हुए भारी इजरायली हमलों के बाद इस समझौते की राह में कुछ मुश्किलें भी खड़ी होती दिख रही हैं।
ईरान की सेना और आईआरजीसी का कड़ा रुख
इस बीच ईरान के अंदर से कुछ तीखे बयान भी सामने आ रहे हैं। ईरान के सेना प्रमुख अली अब्दुल्लाही ने कहा है कि उनकी सेना पूरी तरह मुस्तैद है और बेरूत पर हुए इजरायली हमलों का करारा जवाब दिया जाएगा। वहीं ईरान के संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गलिबाफ ने सीधे अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका या तो अपने वादे निभाना नहीं चाहता या फिर उन्हें पूरा करने की ताकत उसमें नहीं है।
इसके साथ ही, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की नौसेना ने होर्मुज जलडमरू मध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों के लिए एक नई और सख्त गाइडलाइन जारी की है। एक सार्वजनिक समुद्री रेडियो चैनल पर जारी किए गए संदेश में दावा किया गया है कि फिलहाल होर्मुज से आवागमन पूरी तरह बंद है और अगर किसी भी जहाज ने कोई संदिग्ध गतिविधि की, तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा। जहाजों को अगली सूचना मिलने तक मौजूदा स्थिति में ही बने रहने की चेतावनी दी गई है।


Leave a Reply