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11 June 2026

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं। पाकिस्तानी सेना और वहां के आर्मी चीफ आसिम मुनीर के बढ़ते जुल्मों के खिलाफ स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। ‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के विरोध प्रदर्शन और हड़ताल के आह्वान के बाद पूरे इलाके में हाहाकार मचा हुआ है।
बाजार पूरी तरह बंद हैं, सड़कों से गाड़ियां गायब हैं और गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों पर पाकिस्तानी सेना अंधाधुंध गोलियां बरसा रही है। हाल ही में सेना की इस क्रूर फायरिंग में 20 से अधिक बेकसूर नागरिकों की जान जा चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

मुजफ्फराबाद और मीरपुर में भारी तनाव
पीओके के मुजफ्फराबाद में सोमवार से ही भारी तनाव बना हुआ है क्योंकि वहां प्रदर्शनकारियों ने मार्च शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ, मीरपुर और आज़ाद कश्मीर स्टेडियम में सैकड़ों की तादाद में लोग जमा हो गए हैं, जिससे पूरा चक्का जाम हो गया है। कई जगहों पर इंटरनेट और फोन सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं ताकि लोगों की आवाज को दबाया जा सके। हालांकि, जेएसी (JAAC) पर सरकार और प्रशासन ने पूरी तरह पाबंदी लगा दी है, लेकिन इसके बावजूद जनता का हौसला टूटने का नाम नहीं ले रहा है।
वहां की क्रूर सरकार और सेना के खिलाफ वकीलों ने भी मोर्चा खोल दिया है। वरिष्ठ वकील अमजद अली खान की गिरफ्तारी के विरोध में वकीलों ने अदालतों का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया है। ‘फ्रेंड्स ऑफ ह्यूमन’ (FrH) संस्था के अनुसार, यह पूरी लड़ाई सस्ते आटे और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर शुरू हुई थी, जिसे दबाने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरानों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजी आवाज: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने लगाई फटकार
पाकिस्तान के इस दमनकारी रवैये के खिलाफ दुनिया भर में आवाजें उठने लगी हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठन ने भी इस हिंसा पर गहरी चिंता जताई है और खुद को साफ-सुथरा दिखाने की कोशिश में जुटे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की गुहार लगाई है।
वैश्विक मानवाधिकार संस्था ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ और 40 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने इस संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पाकिस्तानी हुकूमत को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बंदूक के दम पर कुचलना और नागरिक अधिकारों को बंधक बनाना बिल्कुल गलत है। ब्रिटिश सांसदों की दौड़धूप और एनआईयू के अनुसार, आगामी क्षेत्रीय चुनावों से पहले सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर पूरी घाटी को छावनी में बदल दिया गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंगामा खड़ा कर दिया है। वहीं जेएसी लंबे समय से पीओजेके की विधानसभा में 12 ‘शरणार्थी सीटों’ को खत्म करने की मांग कर रही है, जो सिर्फ उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 के बाद पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में बस गए थे।

तनाव के बीच भारतीय सेना प्रमुख का उधमपुर दौरा
पीओजेके में जारी इस भारी तनाव और पाकिस्तानी सेना की बढ़ती बर्बरता के बीच भारतीय सेना भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। थलसेना अध्यक्ष ने बुधवार को उधमपुर में भारतीय सेना की उत्तरी कमान मुख्यालय का दौरा किया। वहां उन्होंने एक हाई-लेवल मीटिंग में सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरे का मुख्य मकसद जम्मू-कश्मीर में लागू युद्ध तकनीकों और आधुनिकीकरण की समीक्षा करना था।
सैन्य अधिकारियों का मानना है कि गुलाम जम्मू-कश्मीर के लोग इस समय पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन चला रहे हैं। ऐसे में अपने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर कोई नापाक साजिश रच सकता है। पाकिस्तान पहले भी ऐसा करता रहा है।

अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा तैयारियों पर भी चर्चा
इस उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक में आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने सेना प्रमुख को जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में चल रहे ऑपरेशन्स और आगामी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा तैयारियों के बारे में पूरी जानकारी दी। सेना प्रमुख ने कहा कि आने वाली सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सेना की संचालन क्षमताओं को और ज्यादा मजबूत बनाना बेहद जरूरी है।
दौरे के दौरान सेना प्रमुख को एकीकृत युद्ध प्रणालियों के उपयोग के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विकास के बारे में भी बताया गया। सेना प्रमुख ने नेटवर्क और डेटा-आधारित युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया, जो भविष्य की सुरक्षा तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम हैं।

हालात और बिगड़ने की आशंका
पीओजेके में हालात तब और ज्यादा बिगड़ गए, जब ‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) और वहां के प्रशासन के बीच हुई बातचीत पूरी तरह विफल हो गई। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे पूरी तरह से गैर-कानूनी और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा हमला करार दिया है। अब 27 जुलाई को होने वाले चुनावों को देखते हुए पूरी घाटी को सेना की छावनी में बदल दिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में टकराव और ज्यादा बढ़ने की आशंका है।


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