बांग्लादेश चुनाव: भारत के लिए क्यों है इतना महत्वपूर्ण:
संवाददाता
13 February 2026
अपडेटेड: 4:47 PM 0thGMT+0530
बांग्लादेश आम चुनाव रिजल्ट: बीएनपी सत्ता के शीर्ष पर –
कट्टरपंथी पार्टी जमात ए इस्लामी को मिली करारी हार:
बांग्लादेश में आम चुनाव के अंतिम परिणाम आ चुके हैं जिसमें बीएनपी को प्रचंड बहुमत मिला है।
बांग्लादेश की जनता ने जो फैसला सुनाया है इससे पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति को एक नया ही संकेत मिला है। इस चुनाव में प्रचंड बहुमत बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP को मिला है।
पार्टी के नेता तारिक रहमान अब प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने की तैयारी में हैं। इस जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी है और ये भी कहा है कि भारत लोकतांत्रिक और प्रगतिशील बांग्लादेश के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।
BNP की जीत का भारत के लिए क्या है मायने:
अब सवाल ये है कि BNP की जीत और तारिक अनवर के पीएम पद इन दोनों का भारत और पूरे क्षेत्र के लिए क्या मायने हैं?
भारत की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नई सरकार सुरक्षा सहयोग, विदेश नीति और आर्थिक साझेदारी के मुद्दों पर किस तरह का रुख अपनाती है। अगर BNP भरोसेमंद साझेदार साबित होती है, तो दोनों देशों के रिश्तों में नई मजबूती देखने को मिल सकती है।
दूसरा बड़ा पहलू है जनादेश का सम्मान:
भारत ने हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है और इस बार भी वही रुख अपनाया है। पीएम मोदी ने तारिक रहमान को बधाई देते हुए साफ संदेश दिया कि भारत बांग्लादेश की जनता के फैसले का सम्मान करता है और दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को मजबूत करना चाहता है।
तीसरा पहलू सुरक्षा और कट्टरपंथ से जुड़ा है:
हाल के महीनों में बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों की सक्रियता बढ़ी थी और भारत विरोधी माहौल भी देखने को मिला। नई दिल्ली की सबसे बड़ी चिंता जमात-ए-इस्लामी को लेकर थी, जिसे भारत अक्सर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के प्रभाव में मानता है। जमात ने चुनाव से पहले कई दलों के साथ गठबंधन भी बनाया था और सत्ता की दौड़ में मजबूत दावेदार बन गया था।
ऐसे में भारत ने BNP को अपेक्षाकृत नरम और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देखना शुरू किया।
पाकिस्तान और चीन का प्रभाव:
शेख हसीना के दौर में बांग्लादेश ने पाकिस्तान से दूरी बनाए रखी थी। लेकिन उनके सत्ता से हटने के बाद नीतियों में बदलाव देखने को मिला। पाकिस्तान चाहता था कि जमात सत्ता में आए, ताकि भारत विरोधी रुख मजबूत हो सके। अब BNP की जीत के बाद भारत इस बात पर नजर रखेगा कि नई सरकार पाकिस्तान और चीन के साथ कितनी नजदीकी बढ़ाती है। संतुलन बना रहा तो रिश्ते सहज रहेंगे, लेकिन अगर झुकाव ज्यादा हुआ तो भारत सतर्क हो जाएगा।
पांचवां पहलू भारत और BNP के बीच हालिया राजनीतिक गर्मजोशी का है… पिछले कुछ समय में दोनों के बीच संबंधों में नरमी देखने को मिली… खालिदा जिया के स्वास्थ्य को लेकर भारत की चिंता और उनके निधन पर भारतीय विदेश मंत्री का बांग्लादेश जाना इस बदलते समीकरण का संकेत माना गया। यह दिखाता है कि दोनों पक्ष अब पुराने मतभेदों से आगे बढ़कर नए रिश्ते बनाने की कोशिश कर रहे है।
छठा और बेहद संवेदनशील मुद्दा है बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की स्थिति:
हाल के दिनों में हिंसा और लिंचिंग की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई थी। BNP ने इन घटनाओं की आलोचना की है, जिससे वहां के हिंदुओं को कुछ हद तक राहत की उम्मीद मिली है। नई सरकार से उम्मीद है कि वह सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार और सुरक्षा देने की दिशा में काम करेगी।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया पर भी नजर:
वहां के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने BNP को बधाई जरूर दी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान इस नतीजे से पूरी तरह खुश नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान चाहता था कि जमात-ए-इस्लामी की सरकार बने, ताकि भारत विरोधी माहौल मजबूत हो सके। हालांकि BNP की जीत ने उसके इस सपने को झटका दिया है। इतिहास की बात करें तो 1971 में भारत ने बांग्लादेश की मुक्ति लड़ाई का समर्थन किया था और उस दौर में पाकिस्तानी सेना पर गंभीर अत्याचार के आरोप लगे थे। आज भी बांग्लादेश पाकिस्तान से माफी की मांग करता है।
वहीं जमात-ए-इस्लामी ने उस समय पाकिस्तान का साथ दिया था, जिसे बांग्लादेश की जनता आज तक नहीं भूली है। यानी BNP की जीत सिर्फ बांग्लादेश की राजनीति का बदलाव नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक नया राजनीतिक अध्याय है।
भारत के लिए यह संतुलन और रणनीति का दौर होगा, जबकि पाकिस्तान और चीन के लिए भी यह नतीजा नई चुनौतियां लेकर आया है…