बांसुरी स्वराज का ‘नेशनल हेराल्ड की लूट’ बैग सुर्खियों मे

khabar pradhan

संवाददाता

22 April 2025

अपडेटेड: 1:36 PM 0ndGMT+0530

JPC की ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ बैठक में शामिल, कमेटी 17 मई से शुरू करेगी राज्यों का दौरा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद बांसुरी स्वराज मंगलवार को संसद भवन में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में शामिल हुईं। इस दौरान उनके कंधे पर लटका एक बैग, जिस पर “नेशनल हेराल्ड की लूट” लिखा था, ने सभी का ध्यान खींचा। यह बैग नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस पर भाजपा के हमले को फिर से सुर्खियों में ले आया। JPC ने बैठक में फैसला लिया कि वह 17 मई से विभिन्न राज्यों का दौरा शुरू करेगी ताकि ‘एक देश, एक चुनाव’ पर व्यापक विचार-विमर्श किया जा सके।
बैग ने बटोरी सुर्खियां
बांसुरी स्वराज का यह बैग सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। X पर कई यूजर्स ने इसकी तस्वीरें साझा करते हुए इसे कांग्रेस के खिलाफ भाजपा की रणनीति का हिस्सा बताया। एक यूजर ने लिखा, “बांसुरी स्वराज ने नेशनल हेराल्ड मामले को फिर से उठाकर कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया।” वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे अनावश्यक नाटकीयता करार दिया। एक अन्य यूजर ने लिखा, “JPC की बैठक में गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, न कि इस तरह के फोटोशूट का आयोजन।”
बांसुरी स्वराज ने इस मौके पर कहा, “नेशनल हेराल्ड मामला सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है। यह कांग्रेस की उस सोच को दर्शाता है, जहां वह सेवा के नाम पर सार्वजनिक संस्थानों का दुरुपयोग करती है।” यह बयान उन्होंने हाल ही में लखनऊ में भी दोहराया था, जहां उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर चार्जशीट का हवाला देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
JPC की बैठक और भविष्य की योजना
JPC की यह बैठक ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए आयोजित की गई थी। बैठक में कमेटी ने फैसला लिया कि वह 17 मई 2025 से विभिन्न राज्यों का दौरा शुरू करेगी। इस दौरे का मकसद राज्यों के नेताओं, विशेषज्ञों और हितधारकों से ‘एक देश, एक चुनाव’ की व्यवहार्यता और चुनौतियों पर चर्चा करना है। कमेटी का लक्ष्य इस नीति को लागू करने के लिए एक ठोस ढांचा तैयार करना है, जिसे संसद में पेश किया जा सके।
बैठक में शामिल अन्य सांसदों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे। कुछ सांसदों ने इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया, जबकि विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों ने इसे लागू करने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर सवाल उठाए।
नेशनल हेराल्ड मामला क्या है?
नेशनल हेराल्ड एक समाचार पत्र है, जिसे 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने शुरू किया था। इस मामले में आरोप है कि कांग्रेस ने इसकी संपत्तियों का दुरुपयोग कर यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL) के माध्यम से वित्तीय अनियमितताएं कीं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कई कांग्रेस नेताओं से पूछताछ की है। भाजपा इस मुद्दे को बार-बार उठाकर कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाती रही है। बांसुरी स्वराज का बैग इसी मामले को लेकर कांग्रेस पर तंज कसने का एक प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस ने बांसुरी स्वराज के इस कदम की कड़ी निंदा की है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “भाजपा इस तरह के हथकंडों से जनता का ध्यान असल मुद्दों जैसे महंगाई और बेरोजगारी से हटाना चाहती है। नेशनल हेराल्ड मामले में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, और यह केवल राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।” दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने बांसुरी के कदम का समर्थन करते हुए इसे कांग्रेस की कथित अनियमितताओं को उजागर करने का साहसिक कदम बताया।
सोशल मीडिया पर बहस
X पर इस मुद्दे ने तीखी बहस छेड़ दी है। कुछ यूजर्स ने बांसुरी के बैग को “साहसिक और सटीक” करार दिया, जबकि अन्य ने इसे “सस्ता प्रचार स्टंट” बताया। एक यूजर ने लिखा, “कांग्रेस को नेशनल हेराल्ड मामले की जवाबदेही लेनी चाहिए। बांसुरी ने सही मुद्दा उठाया।” वहीं, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “यह संसद है, कोई ड्रामा थिएटर नहीं। इस तरह की हरकतें गंभीर चर्चा को कमजोर करती हैं।”
आगे की दिशा
JPC की ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ पर चर्चा और बांसुरी स्वराज का बैग दोनों ही अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। जहां एक ओर कमेटी इस नीति को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने की तैयारी में है, वहीं नेशनल हेराल्ड मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आगे कैसे बढ़ता है और JPC अपने दौरे के बाद इस नीति पर क्या निष्कर्ष निकालती है।

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