अमित शाह पर उद्धव ठाकरे गुट का तीखा पलटवार
महाराष्ट्र की सियासी जमीन पर एक बार फिर हलचल मच गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे को लेकर दिए गए बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। शाह ने नांदेड़ में एक रैली के दौरान कहा कि अगर बालासाहेब ठाकरे आज जीवित होते, तो वे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगा लेते। इस बयान पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने तीखा पलटवार करते हुए कहा, “ऐसे लोग जो बालासाहेब का नाम लेते हैं, उन्हें पहले अपनी औकात देखनी चाहिए।” इस बयान ने न केवल महाराष्ट्र की सियासत में गर्मी ला दी है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस छिड़ गई है।
शाह का बयान और सियासी तंज
नांदेड़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया, जिसे उन्होंने भारत की सैन्य ताकत और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान भूल गया कि अब 11 साल पुरानी कांग्रेस की सरकार नहीं है। हमने उरी, पुलवामा और पहलगाम जैसे हमलों का करारा जवाब दिया।” इस दौरान उन्होंने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे होते तो इस ऑपरेशन की सफलता पर गर्व करते और पीएम मोदी की तारीफ करते। शाह ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को “बारात” कहकर उनका मजाक उड़ाया, जो उनकी “राष्ट्रहित के प्रति उदासीनता” को दर्शाता है।
शिवसेना (UBT) का करारा जवाब
शाह के इस बयान पर उद्धव ठाकरे की पार्टी ने पलटवार में कोई कसर नहीं छोड़ी। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने तीखे अंदाज में कहा, “बालासाहेब ठाकरे का नाम लेने से पहले कुछ लोगों को अपनी सियासी और नैतिक औकात देख लेनी चाहिए। बालासाहेब ने कभी भी सत्ता के लिए अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया, लेकिन कुछ लोग सत्ता के लालच में शिवसेना को तोड़ने और उसकी आत्मा को कुचलने में लगे हैं।” राउत ने यह भी कहा कि बालासाहेब का नाम लेकर सियासी रोटियां सेंकने की कोशिश बेकार है, क्योंकि महाराष्ट्र की जनता सब समझती है।
बालासाहेब की विरासत पर सियासी जंग
बालासाहेब ठाकरे की विरासत
महाराष्ट्र की सियासत में हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है। शिवसेना के दो गुटों में बंटने के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि असली शिवसेना कौन है। अमित शाह का बयान इस सियासी जंग को और हवा देने वाला साबित हुआ। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी पार्टी बालासाहेब के सिद्धांतों से भटक गई है। दूसरी ओर, उद्धव गुट ने इसे बीजेपी की साजिश करार दिया, जिसका मकसद शिवसेना की पहचान को कमजोर करना है। राउत ने कहा, “हमारी विचारधारा और बालासाहेब का सम्मान हमारे लिए सर्वोपरि है। जो लोग हमें राष्ट्रहित के खिलाफ बताते हैं, वे पहले अपने गिरेबान में झांकें।”
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
शाह के बयान और शिवसेना (UBT) के पलटवार ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। कुछ यूजर्स ने शाह के बयान का समर्थन करते हुए लिखा, “अमित शाह ने सही कहा। बालासाहेब हमेशा राष्ट्रहित और हिंदुत्व के लिए खड़े रहे। उद्धव की सियासत अब गठबंधन की मजबूरियों में फंस गई है।” वहीं, उद्धव के समर्थकों ने जवाब में लिखा, “बीजेपी को बालासाहेब का नाम लेने का कोई हक नहीं। उन्होंने सत्ता के लिए शिवसेना को तोड़ा और अब उनकी विरासत पर दावा कर रहे हैं।” यह बहस महाराष्ट्र की जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गई है।
ऑपरेशन सिंदूर और सियासी रंग
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शाह का बयान भारत की सैन्य ताकत और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने दुनिया को संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। लेकिन उद्धव ठाकरे के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को “बारात” कहने पर शाह ने उनकी आलोचना की और इसे राष्ट्रहित के प्रति लापरवाही का प्रतीक बताया। जवाब में, शिवसेना (UBT) ने कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा सेना और देश की सुरक्षा का समर्थन किया है, लेकिन बीजेपी इसका सियासी फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।
महाराष्ट्र की सियासत में नया मोड़
यह सियासी वार-पलटवार महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले गहमागहमी को और बढ़ा रहा है। बीजेपी और शिवसेना (UBT) के बीच तल्खी कोई नई बात नहीं है, लेकिन बालासाहेब ठाकरे जैसे प्रतीकात्मक चेहरे को लेकर यह जंग दोनों पक्षों के लिए नाजुक है। उद्धव गुट का दावा है कि वे ही बालासाहेब की असली विरासत के वारिस हैं, जबकि बीजेपी इसे खारिज करते हुए उद्धव पर गठबंधन की सियासत में भटकने का आरोप लगाती है। इस बीच, महाराष्ट्र की जनता इस सियासी नाटक को करीब से देख रही है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह जंग चुनावी नतीजों को कैसे प्रभावित करती है।


Leave a Reply