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27 मई 2026

धार:
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को मौला कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने दी चुनौती, याचिका में भोजशाला को मस्जिद घोषित करने और नमाज की अनुमति देने की मांग।

मध्य प्रदेश का चर्चित धार भोजशाला मामला अब सुप्रीम कोर्ट में एक नई कानूनी लड़ाई की तरफ बढ़ गया है। 15 मई 2026 को आए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को चुनौती देते हुए अब ‘मौला कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी’ ने देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में एक नई अपील दायर कर दी है। सोसाइटी के सद्र अब्दुल समद ने इस नई याचिका की पुष्टि की है। आपको बता दें कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में यह दूसरी चुनौती है, क्योंकि इससे पहले भी एक अपील वहां दायर की जा चुकी है जो अभी लंबित है। हालांकि, इन दोनों अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कब शुरू होगी, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अपने फैसले में साफ कर दिया था कि भोजशाला कोई मस्जिद नहीं, बल्कि एक मंदिर है। इसके साथ ही कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत प्रति शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को वहां नमाज पढ़ने की इजाजत मिली हुई थी। हाईकोर्ट का यह फैसला आने के ठीक अगले ही दिन एएसआई ने मंदिर पक्ष को भोजशाला में साल के पूरे 365 दिन पूजा करने की अनुमति दे दी थी। इस ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ पहली अपील काजी मोइनुद्दीन ने 21 मई को सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी, और अब मौला कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से यह दूसरी याचिका सामने आई है।
मुस्लिम पक्ष की अपील के मुख्य तर्क और मांगें
अदालत में दायर की गई इस नई अपील में मुस्लिम पक्ष ने कई मुख्य बिंदुओं को आधार बनाया है
उनका कहना है कि एएसआई ने अपने सर्वे में वहां मिली वस्तुओं की कार्बन डेटिंग नहीं कराई है।
कार्बन डेटिंग न होने की वजह से उन चीजों की सही और ऐतिहासिक समयावधि तय नहीं की जा सकती।
मस्जिद पक्ष का दावा है कि भोजशाला परिसर में पिछले 700 सालों से लगातार नमाज अदा की जा रही है।
उनका आरोप है कि हाईकोर्ट ने भोजशाला को मस्जिद न मानकर एक तथ्यात्मक भूल (गलती) की है।
इस याचिका के जरिए मांग की गई है कि मुस्लिम पक्ष को फिर से वहां नमाज पढ़ने की इजाजत दी जाए और पूरे भोजशाला परिसर को मस्जिद घोषित किया जाए।
शंकराचार्य ने कहा- यह हिंदुओं का स्थान है और हमेशा रहेगा
इस पूरे कानूनी विवाद के बीच काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती भी मंगलवार को धार भोजशाला पहुंचे। उन्होंने वहां की स्थिति को देखते हुए कहा कि लंदन के संग्रहालय में रखी वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति को वापस लाकर यहीं स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इसमें कोई अड़चन आती है, तो यहां शुद्ध ग्रेनाइट संगमरमर की एक नई भव्य मूर्ति बनाकर स्थापित की जाएगी। शंकराचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि यह स्थान हमेशा से हिंदुओं का रहा है, आज भी है और हमेशा रहेगा।
भीषण गर्मी में भी उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब
हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद से ही भोजशाला में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की तादाद बहुत तेजी से बढ़ी है। पिछले 11 दिनों के भीतर ही यहां दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडे ने बताया कि इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी के बावजूद सुबह से लेकर शाम तक दर्शनार्थियों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। सबसे खास बात यह है कि अब केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि दिल्ली समेत देश के अलग-अलग कोनों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। इससे पहले तक श्रद्धालुओं की भीड़ मुख्य रूप से केवल मंगलवार के दिन ही सीमित रहती थी, लेकिन अब हर रोज हजारों लोग आ रहे हैं।


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