भोजशाला विवाद: ‘मस्जिद पक्ष के दस्तावेजों में ही छिपे हैं मंदिर होने के सबूत’, हाई कोर्ट में हिंदू पक्ष का बड़ा दावा

khabar pradhan

संवाददाता

9 April 2026

अपडेटेड: 5:09 PM 0thGMT+0530

भोजशाला विवाद: ‘मस्जिद पक्ष के दस्तावेजों में ही छिपे हैं मंदिर होने के सबूत’, हाई कोर्ट में हिंदू पक्ष का बड़ा दावा

9 अप्रैल 2026

इंदौर:
धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष (मौला कमालुद्दीन सोसायटी) ने अदालत में जो शपथ पत्र और सबूत पेश किए हैं, वे खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि भोजशाला मूल रूप से एक मंदिर ही है।

14वीं शताब्दी से पहले मस्जिद का वजूद नहीं था
सुनवाई के दौरान एडवोकेट जैन ने तर्क दिया कि मुस्लिम पक्ष की ओर से जिन किताबों और दस्तावेजों का हवाला दिया गया है, उनसे यह साफ होता है कि 14वीं शताब्दी से पहले वहां मस्जिद का कोई नामो-निशान नहीं था। इसके विपरीत, ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि भोजशाला का निर्माण साल 1034 में ही हो चुका था।
हिंदू पक्ष का कहना है कि मस्जिद बनाने के लिए मंदिर के ही मलबे और सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने अदालत को बताया कि इस्लामिक कानून के अनुसार किसी दूसरे धर्म के इबादतगाह को तोड़कर या उसकी सामग्री से मस्जिद बनाना वर्जित है, जो इस ढांचे के मूल स्वरूप पर सवाल खड़े करता है।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद देवता हमेशा वहां रहते हैं
अदालत में अपनी बात रखते हुए वकील ने एक महत्वपूर्ण धार्मिक और कानूनी बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि एक बार जब किसी मंदिर में मूर्ति की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ हो जाती है, तो हिंदू मान्यताओं के अनुसार देवता वहां अदृश्य रूप में हमेशा मौजूद रहते हैं। भले ही हमलावरों ने मूर्तियों को हटा दिया हो या ढांचे को नुकसान पहुँचाया हो, लेकिन उस स्थान का धार्मिक अधिकार खत्म नहीं होता। उन्होंने इस स्थिति की तुलना ‘ग्रहण’ से की, जो कुछ समय के लिए रोशनी रोक सकता है लेकिन सूरज का अस्तित्व खत्म नहीं कर सकता।

एएसआई (ASI) के सर्वे पर आज होगी चर्चा
इस मामले में अब सबकी नजरें गुरुवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वे और उनकी रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा होगी। हिंदू पक्ष एएसआई की रिपोर्ट और वहां से मिले फोटोग्राफ्स के आधार पर अपनी दलीलें पेश करेगा।

क्या कहता है पूजा स्थल अधिनियम?
विष्णु शंकर जैन ने ‘पूजा स्थल अधिनियम’ (Places of Worship Act) का जिक्र करते हुए कहा कि यह कानून किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने से रोकता है। चूंकि भोजशाला का अस्तित्व मस्जिद से बहुत पहले का है और यह मूल रूप से एक मंदिर है, इसलिए इसके धार्मिक स्वरूप को बदला नहीं जा सकता।
हाई कोर्ट में चल रही इस बहस ने अब इस पुराने विवाद को एक नए कानूनी धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां अब पुरातात्विक सबूत सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे।

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