9 मार्च 2026
भोपाल।
पुराने शहर में रंगपंचमी के अवसर पर रविवार को पारंपरिक चल समारोह का आयोजन किया गया। सुबह करीब 11 बजे सुभाष चौक से यह जुलूस शुरू हुआ, जिसमें काशी और ब्रजधाम की झलक देखने को मिली और श्रद्धालु रंग-गुलाल के साथ उत्सव में शामिल हुए।
लगभग 6 किलोमीटर का सफर तय करते हुए यह जुलूस चार घंटे बाद हनुमानगंज गल्ला मंडी पहुंचकर संपन्न हुआ। रास्ते भर लोगों ने रंग और गुलाल की बारिश के साथ जुलूस का स्वागत किया।
सोमवारा, इतवारा और मंगलवारा क्षेत्रों में भी जुलूस का जोरदार स्वागत किया गया। वहीं शाहपुरा, बरखेड़ी और संत नगर में भी चल समारोह निकाले गए, जहां लोगों ने उत्साह के साथ रंगपंचमी का पर्व मनाया।
चौराहों पर फूल-गुलाल से हुआ हुरियारों का स्वागत,
इस अवसर पर निकले चल समारोह में शहर के कई चौराहों पर हुरियारों का फूल और गुलाल बरसाकर स्वागत किया गया। जुलूस में टीम इंडिया, शिव-पार्वती की होली और मसान की होली की आकर्षक झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।
इन झांकियों और हुरियारों की मस्ती को देखकर ऐसा माहौल बन गया, मानो भोपाल में काशी और ब्रजधाम का रंगोत्सव उतर आया हो। जुलूस में शामिल लोगों का विभिन्न चौराहों पर फूल-गुलाल से स्वागत किया गया, जिससे पूरा शहर रंगों और उत्साह में सराबोर नजर आया।
रंगपंचमी का महत्व
रंगपंचमी को श्रीपंचमी और देव पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन देवी-देवता भी रंगों का उत्सव मनाते हैं। इसलिए इस दिन रंगों के साथ विशेष उल्लास और श्रद्धा के साथ पर्व मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता यह भी है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने राधा रानी के साथ होली खेली थी। इसी कारण रंगपंचमी को प्रेम, आनंद और उत्सव का प्रतीक माना जाता है।


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