17 मई 2026
भोपाल:
भोपाल मेट्रो के दूसरे चरण के तहत ऑरेंज लाइन और ब्लू लाइन प्रोजेक्ट को लेकर विवाद गहरा गया है। जंक्शन पॉइंट जिंसी चौराहे से गुजरने वाली ट्रैक निर्माण की योजना के कारण इस क्षेत्र की कई संपत्तियां अधिग्रहण की जद में आ रही हैं। प्रशासन द्वारा की गई जमीनों की नापाई के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, क्योंकि इस योजना के चलते संत रविदास मंदिर समेत करीब 40 से अधिक घर और दुकानें प्रभावित हो रही हैं। उचित मुआवजा न मिलने और संपत्तियों के टूटने के डर से अब यह मामला पूरी तरह गरमा चुका है।
रहवासियों का गंभीर आरोप है कि प्रशासन ने मेट्रो की जद में आ रहे मकानों, दुकानों और धार्मिक स्थलों का सही तरीके से सर्वे और नापाई नहीं की है। इसके साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि जिंसी चौराहे पर ऑरेंज लाइन के अलावा ब्लू लाइन मेट्रो प्रोजेक्ट को भी क्यों लाया जा रहा है, जबकि यहां पहले से ही भारी भीड़ और संकरा रास्ता है। आपको बता दें कि इस ऐतिहासिक चौराहे पर करीब 500 साल पुराना संत रविदास मंदिर स्थित है, जिसके अस्तित्व पर अब संकट मंडराने लगा है।
अलग-अलग नापाई से भ्रम की स्थिति, रहवासियों ने उठाए सवाल
जिंसी चौराहे पर फल की दुकान चलाने वाले मोहम्मद जमीरउद्दीन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मेट्रो परियोजना के लिए जमीन की नापाई किसी तय मापदंड या मानकों के अनुसार नहीं की जा रही है।
अधिग्रहण की जद में आने वाली जगहों की चौड़ाई हर हिस्से में अलग-अलग बताई जा रही है:
* जिंसी चौराहे से जहांगीराबाद चौराहे तक अलग-अलग जगहों पर कभी 6 मीटर, कभी 9 मीटर तो कहीं 15 मीटर तक जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।
* इस अनियोजित नापाई के कारण पूरे इलाके के दुकानदारों और मकान मालिकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
* स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों ने प्रस्तावित डबल सर्विस लेन को छोड़कर कुछ प्रभावशाली लोगों की दुकानों और मकानों को बचाने के लिए जानबूझकर मेट्रो लाइन को घनी आबादी वाले रहवासी इलाकों की तरफ मोड़ दिया है।
मार्बल दुकान के संचालक मनीष साहू ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के उनके बैंक खातों में मुआवजे की नाममात्र राशि डाल दी गई है। उन्हें आज तक यह भी नहीं बताया गया कि उनकी कितनी जमीन ली जा रही है और इस मुआवजे का निर्धारण किस आधार पर किया गया है।
काजी कैंप इलाके में विरोध: ‘नहीं चाहिए मेट्रो स्टेशन’ के लगे बैनर
भोपाल टॉकीज के पास स्थित बड़ा बाग कब्रिस्तान और नारियलखेड़ा की संपत्तियों को लेकर चल रहा विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि अब काजी कैंप इलाके में एक नया मोर्चा खुल गया है। सिंधी कॉलोनी से काजी कैंप क्षेत्र में बनने वाले प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन को लेकर स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने मोर्चा खोल दिया है।
व्यापारियों ने एकजुट होकर अपनी दुकानों के बाहर मेट्रो स्टेशन के विरोध में बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगा दिए हैं। इन पोस्टरों पर साफ शब्दों में लिखा है कि काजी कैंप क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन नहीं बनना चाहिए क्योंकि इससे उनका पूरा कारोबार ठप हो जाएगा। स्थानीय लोग इस स्टेशन को किसी अन्य जगह पर शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का पक्ष
भोपाल के एसडीएम दीपक पांडे ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भोपाल मेट्रो के लिए केवल उतनी ही जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है जितनी बेहद जरूरी है। प्रशासन लगातार लोगों के सुझावों को सुन रहा है और उनकी समस्याओं का उचित निराकरण करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने साफ किया कि प्रशासन बिना किसी सहमति के मुआवजे की राशि खातों में नहीं डाल रहा है और सभी नियमों का पालन किया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रिवंक कानूनगो ने भी इस संवेदनशील मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि भोपाल मेट्रो की जद में ऐतिहासिक संत रविदास मंदिर का हिस्सा भी आ रहा है। वे लगातार इस प्रयास में जुटे हैं कि इस गंभीर समस्या का कोई बीच का रास्ता या उचित समाधान निकाला जाए। उन्होंने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि मेट्रो लाइन का विकल्प या नक्शा इस तरह तैयार किया जाए जिससे किसी भी धार्मिक समाज की भावनाएं आहत न हों और इस प्राचीन धरोहर को नुकसान से बचाया जा सके।


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