भोपाल:
मध्य प्रदेश सरकार को करीब छह दशक बाद अपने उन मंदिरों का पता चला है जो राज्य की सीमा से बाहर स्थित हैं। दशकों पुराने सरकारी दस्तावेजों के खुलने से अब ऐसे 85 नए मंदिरों का रिकॉर्ड सामने आया है, जिन पर मध्य प्रदेश सरकार अपना दावा पेश करने की तैयारी कर रही है। इन मंदिरों के पास अरबों-खरबों की संपत्ति होने का अनुमान है।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, ये मंदिर मुख्य रूप से निम्नलिखित पांच राज्यों में स्थित हैं:
महाराष्ट्र: 36 मंदिर
राजस्थान: 33 मंदिर
उत्तर प्रदेश: 12 मंदिर
तमिलनाडु: 02 मंदिर
छत्तीसगढ़: 01 मंदिर
इनमें अयोध्या का एक राम मंदिर और भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग क्षेत्र के मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भी शामिल हैं।
कैसे सामने आया यह राज?
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में अपने पुराने अभिलेखों (records) की समीक्षा शुरू की, जो पिछले 60 सालों से बंद पड़े थे। जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले जिनसे पता चला कि आजादी से पहले मध्य प्रदेश की विभिन्न रियासतों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में इन मंदिरों का निर्माण कराया था और उनके संचालन के लिए जमीनें दान में दी थीं। रियासतों के विलय के बाद ये संपत्तियां सरकारी रिकॉर्ड में तो रहीं, लेकिन समय के साथ लोग इन्हें भूल गए।
सरकार की अगली रणनीति
अब सरकार इन मंदिरों की सूची तैयार कर संबंधित राज्यों को भेजेगी। इसके लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी जो जमीन और संपत्ति के दस्तावेजों की जांच करेंगी और मालिकाना हक के लिए कानूनी दावा मजबूत करेंगी।
चुनौतियां भी हैं
इतने लंबे समय तक दावा न करने के कारण अब इन पर अधिकार पाना आसान नहीं होगा। कई जगहों पर स्थानीय पुजारियों या अन्य लोगों का कब्जा है और मंदिरों की आय का उपयोग भी स्थानीय स्तर पर ही हो रहा है। ऐसे में सरकार को लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़नी पड़ सकती है।