3 June 2026: खबर प्रधान डेस्क:
भोपाल।
मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फ़ैसला लिया है। राज्य सरकार अब स्वामित्व योजना के तहत गांवों के मकान, दुकान और भूखंडधारकों को उनकी अचल संपत्ति का मालिकाना हक़ बिल्कुल मुफ़्त में देने जा रही है। इसका मतलब यह है कि जिन ग्रामीणों को योजना के तहत अधिकार-पत्र (पट्टा) मिल चुका है, उनके भूखंड की रजिस्ट्री का पूरा ख़र्च सरकार उठाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में इस बड़े प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी गई है। इस पूरी योजना को अगले एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की तैयारी इस बड़े अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराने की है।
स्टांप ड्यूटी का 3,800 करोड़ का बोझ उठाएगी सरकार:
गांवों में मुफ़्त रजिस्ट्री की सुविधा देने के लिए राज्य सरकार वाणिज्यिक कर विभाग को लगभग 3,800 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी की भरपाई ख़ुद करेगी। इस फ़ैसले का सीधा लाभ मध्य प्रदेश के 48.32 लाख ग्रामीणों को मिलेगा। ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाने वाला मध्य प्रदेश पूरे देश का पहला राज्य बन गया है।
मुफ़्त रजिस्ट्री होने से संपत्तिधारकों को सबसे बड़ा फ़ायदा यह होगा कि अब वे अपने मकान या दुकान के काग़ज़ातों पर बैंकों से आसानी से लोन (ऋण) ले सकेंगे, जिससे गांवों में व्यापार और रोज़गार के नए रास्ते खुलेंगे।
क्यों पड़ी इस नए नियम की ज़रूरत?
दरअसल, मध्य प्रदेश में अब तक स्वामित्व योजना के तहत 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों (काग़ज़ातों) का निर्माण किया जा चुका है, जिनमें से 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं। इन लोगों को अधिकार पत्र तो बांट दिए गए थे, लेकिन क़ानूनी पेचीदगियों के कारण उन्हें इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था।
मध्य प्रदेश के मौजूदा स्वराज अधिनियम और मप्र उपकर अधिनियम में स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क (रजिस्ट्री फ़ीस) से छूट देने का कोई प्रावधान नहीं था। इसलिए सरकार अब इस योजना को ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह लागू करने के लिए इन दोनों अधिनियमों में संशोधन करने जा रही है, जिसके लिए जल्द ही एक अध्यादेश लाया जाएगा।
योजना की निगरानी के लिए बनेगी हाई-लेवल कमेटी:
इस पूरी योजना को बिना किसी गड़बड़ी और पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक विशेष समीक्षा समिति बनाई जाएगी।
इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त या संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास के साथ-साथ एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह कमेटी योजना की हर प्रगति पर नज़र रखेगी ताकि तय समय सीमा के अंदर सभी 48 लाख से ज़्यादा ग्रामीणों को उनकी ज़मीन का असली मालिकाना हक़ मिल सके।


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