महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा में मुस्लिम समुदाय का 5% आरक्षण किया खत्म:

khabar pradhan

संवाददाता

18 February 2026

अपडेटेड: 12:29 PM 0thGMT+0530

महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा में मुस्लिम समुदाय का 5% आरक्षण किया खत्म:

महाराष्ट्र की सरकार ने मुस्लिम समुदाय को शिक्षा में दिया गया 5% आरक्षण पूरी तरह समाप्त कर दिया है।  अब इस निर्णय के तहत ना कोई प्रवेश मिलेगा और ना ही कोई प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे । इसके अलावा सभी पुराने आदेश भी रद्द कर दिए गए हैं।
यानी अब विद्यार्थियों को कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पांच प्रतिशत का आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा और ना ही नई जाति प्रमाण पत्र या वैधता प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। यह आदेश मंगलवार रात देर जारी किया गया।
इसमें मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को  5%आरक्षण एसईबीसी यानी सामाजिक और शैक्षणिक  रूप से पिछड़े वर्ग को आरक्षण के रूप में दिया जाता था। महाराष्ट्र की सरकार ने सामाजिक न्याय विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए नया प्रस्ताव जारी कर उसे पूर्व आदेश को वापस ले लिया है जिसमें शैक्षणिक संस्थान सरकारी और अर्ध सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत का आरक्षण दिया गया था।  यह आरक्षण शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश सरकारी और अर्ध सरकारी नौकरियों में भर्ती हेतु लागू किया गया था।

कब शुरू हुआ था 5% आरक्षण का प्रावधान:
महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या करीब 11.5% है। जिसमें मुस्लिम सामुदाय को आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा हुआ  दिखाया गया था। वर्ष 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार एक  डॉ महमूदुर रहमान समिति का गठन किया ,जिसमें शिक्षा और नौकरी में मुस्लिम समुदाय के लिए 8% आरक्षण की सिफारिश की थी। जिसमें 2014 में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और एनसीपी की सरकार ने एक अध्यादेश जारी किया ,जिसमें सरकारी स्कूल कॉलेज में प्रवेश के साथ-साथ नौकरी में मराठों को 16%  और मुसलमान को 5% आरक्षण का प्रावधान दिया गया। जिसमें नवगठित विशेष पिछड़ा वर्ग- ए में शामिल करके 50 मुस्लिम समुदायों को पांच प्रतिशत कोटा देने का भी निर्णय लिया गया।

यह अध्यादेश संबंधित आदेश था अनिश्चितता की स्थिति में:

मुसलमानों को दिया गया पांच प्रतिशत शैक्षणिक आरक्षण सरकार ने 2014 में शुरू किया था।
और यह आरक्षण अध्यादेश के रूप में ही लागू  हुआ था ,किंतु कानून नहीं बना था। अदालत की रोक के चलते कई वर्षों से यह अनिश्चितता में लटका हुआ था । जिसे अब सरकार ने पूरी तरह खत्म कर दिया है। सरकार की नई गाइडलाइंस के अनुसार अब ना तो किसी संस्था में इस श्रेणी के तहत एडमिशन दिया जाएगा और ना ही कोई लंबित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी । यानी इस मामले को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

सरकार के इस फैसले पर AIMIM के  सांसद की प्रतिक्रिया:
सरकार के इस फैसले पर ए आई एम आई एम (AIMIM ) के सांसद इम्तियाज जलील ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने  यह रमजान का तोहफा दिया है।  जिसे मुसलमान का 5% आरक्षण खत्म कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह फैसला तब लिया गया, जब मुसलमान में शिक्षा छोड़ने की दर सबसे अधिक है।

अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव का हुआ तबादला:

आपको बता दें कि 28 जनवरी से 2 फरवरी 2026 के बीच 75 हजार से अधिक शैक्षणिक संस्थान को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया था।
इसी बीच अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव मिलिंद शिनॉय का तबादला कर दिया गया है।
यह विवाद तब और गहरा गया जब इनमें से कई फाइलों पर पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद डिजिटल हस्ताक्षर होने का संदेश भी उभर कर आ रहा है।
इसलिए यह सवालों के घेरे में है, जिसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी 75 मंजूरियों पर रोक लगा दी है।
सरकार के इस फैसले ने आरक्षण के मुद्दे को फिर एक बार विवादों में ला दिया है और बहस का मुद्दा बना दिया है।
कांग्रेस नेता प्रो. वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने इस मुस्लिम समुदाय पर बड़ा झटका बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है।  उन्होंने कहा कि सरकार ने पुराने सभी GR रद्द करके आरक्षण की प्रक्रिया ही खत्म कर दी।  शिक्षा में पांच प्रतिशत आरक्षण की मंजूरी हाई कोर्ट ने दी थी, फिर सरकार ने इसे लागू क्यों नहीं किया । यह सरकार पिछड़ें वर्गों के हक  को समाप्त कर रही है।

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