मुंबई में लहराया बीजेपी का परचम: सत्ता से बेदखल ठाकरे बंधु:
संवाददाता
17 January 2026
अपडेटेड: 1:00 PM 0thGMT+0530
केंद्र में नरेंद्र- मुंबई में देवेंद्र– मातोश्री में छाया सन्नाटा!
बीएमसी चुनाव में लहराया बीजेपी का परचम:
मुंबई ने इस बार ऐसे तस्वीरें दिखाई है जो कभी भी मुंबई की फितरत में नहीं था। मुंबई का मिजाज पूरी तरह से बदला हुआ है। ये 90 के दशक की मुंबई तो बिल्कुल नहीं है।
.पूरी तरह से चीजें दूसरे पाले में शिफ्ट होती हुई दिखती हैं। .इतना ही नहीं पूरे महाराष्ट्र में बीजेपी की एकतरफा लहर देखी ग गई,जो परिणाम आये हैं शायद बीजेपी ने भी नहीं सोचा होगा।
बीजेपी कार्यालय में जश्न का माहौल:
जश्न का माहौल ,ढोल नगाड़ों और गुलाल के साथ बीजेपी कार्यालयों में देखा जा रहा है। जय शिवानी जय भवानी के नारों से कार्यकर्ताओं का जोश हाई रहा। इस बार के चुनाव मुंबई को एक अळग ही रंग दे गये हैं।
ये बीएमसी की नहीं बल्कि आने वाले सभी चुनाव की तस्वीर देखी जा रही है। जिस तरह से महायुति की जीत हुई है उसे देखकर कहा जा सकता है कि बीजेपी के टॉप लीडर्स से लेकर महाराष्ट्र की पॉलिटिकल पैनल औऱ तमाम कार्यकर्ता अपनी पार्टी की योजनाओं को जमीन से जुड़े लोगों तक पहुंचाने में कामयाब रही। और महायुति में इंडी गठबंधन का किला ढहा दिया। सीएम देवेंद्र फणनवीस ने कहा महाराष्ट्र में महाविजय हुई है ।एकनाथ शिंदे ने कहा जनता ने दोनों ठाकरे भाइयों को जवाब दे दिया है।
मातोश्री में छाया सन्नाटा:
महाराष्ट्र में देवा भाऊ के कमाल से कमल खिल गया ।25 साल का वनवास खत्म। मुंबई समेत सभी बड़े ठिकानों पर बीजेपी का परचम लहराया गया है और मातोश्री में सन्नाटा पसरा हुआ है। बीजेपी को निकाय चुनाव में ऐतिहासिक जीत मिली है। देवा भाऊ ने ठाकरे बंधुओं के राज को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। मुंबई महानगरपालिका के चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर जश्न मना रही है ।
ऐतिहासिक जीत से बड़ा फडणवीस का कद:
बीजेपी के झंड़ों से पट गया महाराष्ट्र और इस जीत के हीरो बने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं। मराठी मानुष के देवा भाउ। उत्तर भारतीयों के बड़े भाई और दक्षिण के अन्ना— जिन्होंने अपनी रणनीति से ,अपनी सूझबूझ से औऱ अपनी मेहनत से बीजेपी को प्रचंड जीत तो दिलाई । साथ ही अपने प्रतिद्वंदी उद्धव ठाकरे को भी सत्ता से बहुत दूर हाशिए पर धकेल दिय। इसके पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को शानदार जीत मिली थी औऱ अब निकाय चुनावों में भी बीजेपी जबरदस्त प्रदर्शन किया है।
25 सालों से सत्ता के लिए तरस रही बीजेपी का वनवास खत्म हो गया है। अब बीजेपी गठबंधन का राज बीएमसी पर होगा। इस जीत के सबसे बड़े नायक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणवीस माने जा रहे हैं। इस जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है जोश है और मुंबई में जश्न मन रहा है
जीत के पीछे रही कड़ी मेहनत:
ये इतनी बड़ी जीत ऐसे ही नहीं मिल गई है । 24 घंटे सातों दिन की मेहनत का परिणाम है। उनके करीबी बताते हैं कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निकाय चुनाव के लिए काफी मेहनत की। चुनावी सभाओं से लेकर डोर टू डोर कैंपेन में वह शामिल हुए। मुंबई में लोगों के दरवाजे पर जाकर, घरों में बैठकर उनसे संवाद किया। लोगों को भरोसा दिलाया कि ये विकास की सरकार है उसी का असर हुआ है कि मुंबई में बीजेपी ने कमाल किया है।
ठाकरे ब्रदर्स की नहीं थी लोगों के बीच पहुंच:
वहीं, इसके उलट मुंबई निकाय चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स तक लोगों की पहुंच आसान नहीं थी। उद्धव ठाकरे खुद भी लोगों से कनेक्ट नहीं कर पाए। उनका बेटे ने भी दूरी बनाए रखी अब पुरानी विरासत के सहारे आकिर कब तक जीतते रहेंगे। फडणवीस ने मराठी भाषियों से लेकर गैर मराठियों तक को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
नहीं चला मराठी कार्ड:
जबकि राज ठाकरे ने सीधा सीधा गाली गलौज कर बात की। उनका 38 फीसदी लोगों का मराठी कार्ड नहीं चला। देवेंद्र फडणवीस सिर्फ मुंबई ही नहीं, प्रदेश के सारे नगर निगम पर मेहनत की और परिणामों को जीत में बदल दिया। कुल 70 से 80 कार्यक्रम किए। इनमें उनकी 37 चुनावी रैलियां हैं। यहां तक कि रैलियों और सभाओं से वक्त मिलने के बाद वो मुंबई की गलियों में बाइक या स्कूटी से निकल जाते थे। अपनी सरकार के कार्यों को लोगों तक पहुंचाते थे और पूरी तरह से चुनावी हवा बीजेपी के पक्ष में बनाई । मीडिया के जरिए भी अपनी बातों को लगातार रखते रहे थे। चुनाव के दौरान अलग-अलग जगहों पर उन्होंने कुल 33 इंटरव्यू दिए। इन इंटरव्यूज की हर जगह चर्चा भी हुई। वह लगातार ये मैसेज देते रहे कि हम कितने सजग हैं।
देवेंद्र फडणवीस की छवि है बिल्कुल बेदाग:
सीएम फडणवीस ऐसे नेता है जिनकी व्यक्तिगत छवि बेदाग है। मधुरभाषी हैं, जनता में लोकप्रिय हैं ,मेहनती हैं…और अपनी बात कहने का उनका तरीका है जो लोगों को पसंद आता है।
ठाकरे ब्रदर्स जहां मराठी वर्सेज गैर मराठी करने में लगे रहे। वहीं, देवेंद्र फडण्वीस ने इन विवादित मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी। वो सबकों साधकर चलने की नीति पर काम करते रहे। यही वजह रही है कि ठाकरे परिवार के कई अभेद किलें में उन्होंने सेंधमारी की और किला ढह गया। अब मातोक्षी में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा है। दोनों भाइयों की जुलबंदी भी कोई चमत्कार नहीं कर सकी या यूं कहें कि सीएम फणनवीस के सारे दांव उन पर भारी पड़े पूरे चुनाव के दौरान देवेंद्र फडणवीस अपनी पार्टी लाइन से भटके नहीं। वो हिंदुत्व की बातें करते थे साथ में विकास की योजनाओं के बारे में लोगों को बताते थे। सुबह से लेकर रात तक देवा भाऊ कैंपेन में लगे रहे। समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें देवा भाऊ के रूप में प्रचारित किया। शासन के सामने कई चुनौतियां भी आईं, जिसने उन्होंने आसानी से सुलझाया है। इस जीत की सबसे अहम बात यह रही है कि देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे ब्रांड को कभी हावी नहीं होने दिया।श्रमहाविकास अघाड़ी गठनबंधन पहले ही बिखर गया था। कांग्रेस की राहें अलग हो गई। मगर देवेंद्र फडणवीस ने अपने साथियों को एकजुट रखा। तमाम गिले शिकवे को भूलाकर सभी लोग साथ में लड़े ।
महिला वोटर्स ने दिखाया कमाल:
महाराष्ट्र में महिला केंद्रित योजनाएं भी गेमचेंजर साबित हुई हैं। बड़ी संख्या में महिला वोटर्स ने बीजेपी का साथ दिया ।
महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी के अंदर देवेंद्र फडणवीस सबसे बड़े चेहरे के रूप में उभरे हैं। विधानसभा और निकाय चुनाव में प्रचंड जीत के बाद तमाम क्षत्रप नेता अब हाशिए पर हैं। इसमें उद्धव ठाकरे राज ठाकरे से लेकर शरद पवार तक सभी चारो खाने चित्त हैं ।
और केंद्र में नरेंद्र और मुंबई में देवेंद्र की जोड़ी ने कमल का रंग और भी लाल कर दिया है।