यूक्रेन: अफगानिस्तान पार्ट-2 की राह पर?
संवाददाता
27 May 2025
अपडेटेड: 7:13 AM 0thGMT+0530
यूक्रेन: अफगानिस्तान पार्ट-2 की राह पर?
पुतिन की रणनीति के सामने अमेरिका का यू-टर्न!
यूक्रेन का युद्धक्षेत्र एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सैन्य रणनीति और उनके दमदार कदमों ने न केवल यूक्रेन को बल्कि पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन अब अफगानिस्तान की तरह एक लंबे और जटिल युद्ध की ओर बढ़ रहा है, जहां से निकलना किसी भी पक्ष के लिए आसान नहीं होगा। इस बीच, खबरें उड़ रही हैं कि अमेरिका अपनी नीतियों में बदलाव की ओर कदम बढ़ा रहा है। क्या यह सचमुच एक यू-टर्न है, या फिर रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन? आइए, इस जटिल परिदृश्य को गहराई से समझते हैं।
यूक्रेन संकट: एक नया अफगानिस्तान?
यूक्रेन में चल रहा संघर्ष अब अपने तीसरे साल में प्रवेश कर चुका है। रूस की सैन्य कार्रवाइयों और यूक्रेन के प्रतिरोध ने इस युद्ध को एक लंबी खींचतान में बदल दिया है। अफगानिस्तान में दशकों तक चले युद्ध की तरह, यूक्रेन भी अब एक ऐसी जटिल स्थिति में फंसता नजर आ रहा है, जहां जीत की परिभाषा धुंधली होती जा रही है। रूस की ओर से लगातार मिसाइल हमले, ड्रोन हमले और जमीन पर बढ़त ने यूक्रेन की स्थिति को कमजोर किया है। दूसरी ओर, यूक्रेन ने पश्चिमी हथियारों और समर्थन के दम पर अब तक हार नहीं मानी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह युद्ध अब एक अंतहीन दलदल में तब्दील हो रहा है, जैसा कि अफगानिस्तान में देखा गया था?
पुतिन की रणनीति: शतरंज के माहिर खिलाड़ी
व्लादिमीर पुतिन की रणनीति ने पश्चिमी देशों को हैरान कर रखा है। उनकी सैन्य रणनीति न केवल युद्ध के मैदान तक सीमित है, बल्कि यह वैश्विक कूटनीति और आर्थिक दबाव का भी हिस्सा है। रूस ने ऊर्जा आपूर्ति को हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए यूरोप को दबाव में लाने की कोशिश की है। इसके साथ ही, रूस ने गैर-पश्चिमी देशों, जैसे भारत, चीन और कुछ अफ्रीकी देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत किया है। यह एक ऐसी चाल है जो पुतिन को वैश्विक मंच पर एक मजबूत खिलाड़ी बनाए रखती है। उनकी यह रणनीति यूक्रेन को एक लंबे युद्ध में उलझाकर पश्चिम को थकाने की कोशिश प्रतीत होती है, जैसा कि अफगानिस्तान में सोवियत-अमेरिकी टकराव के दौरान देखा गया था।
अमेरिका का यू-टर्न: सच या अफवाह?
हाल के दिनों में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका अपनी यूक्रेन नीति पर पुनर्विचार कर रहा है। शुरुआत में अमेरिका और नाटो ने यूक्रेन को अरबों डॉलर के हथियार और आर्थिक सहायता प्रदान की थी। लेकिन अब, जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंच रहा है, अमेरिका में इस सहायता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका अब यूक्रेन को और अधिक सैन्य सहायता देने के बजाय शांति वार्ता की ओर झुक रहा है। यह एक तरह का यू-टर्न हो सकता है, क्योंकि पहले अमेरिका ने रूस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इसे यू-टर्न की बजाय एक रणनीतिक बदलाव मानते हैं, जहां अमेरिका अपने संसाधनों को अन्य वैश्विक चुनौतियों, जैसे चीन के साथ तनाव, की ओर केंद्रित करना चाहता है।
सोशल मीडिया पर बहस: क्या कह रहे हैं लोग?
सोशल मीडिया पर इस खबर ने तूफान मचा दिया है। कुछ यूजर्स का मानना है कि अमेरिका ने यूक्रेन को एक प्रॉक्सी युद्ध में धकेल दिया और अब उसे अकेला छोड़ने की तैयारी कर रहा है। एक यूजर ने लिखा, “पहले अफगानिस्तान को छोड़ा, अब यूक्रेन की बारी? अमेरिका की नीति बस अपने हितों तक सीमित है।” वहीं, कुछ लोग पुतिन की रणनीति की तारीफ कर रहे हैं, मानते हुए कि उन्होंने पश्चिम को बैकफुट पर ला दिया है। हालांकि, यूक्रेन के समर्थकों का कहना है कि यह युद्ध केवल यूक्रेन का नहीं, बल्कि वैश्विक लोकतंत्र और स्वतंत्रता का है। यह बहस दर्शाती है कि यूक्रेन का मुद्दा कितना जटिल और भावनात्मक है।
वैश्विक प्रभाव: भारत की क्या भूमिका?
भारत इस पूरे घटनाक्रम में एक संतुलित रुख बनाए हुए है। रूस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखते हुए भारत ने यूक्रेन के साथ भी मानवीय सहायता के माध्यम से रिश्ते बनाए हैं। भारत ने बार-बार शांति वार्ता की वकालत की है, और यह संभव है कि आने वाले समय में भारत इस युद्ध को खत्म करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाए। भारत की यह स्थिति न केवल उसकी कूटनीतिक ताकत को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि वह वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में उभर रहा है।