रंगपंचमी पर इंदौर की ऐतिहासिक गेर: रंग-गुलाल की मिसाइलें, टेसू के फूलों से बनेगा तिरंगा

khabar pradhan

संवाददाता

7 March 2026

अपडेटेड: 12:45 PM 0thGMT+0530

7 मार्च 2026

इंदौर। शहर की प्रसिद्ध रंगपंचमी गेर इस बार रविवार को निकलेगी, जिसमें आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक उत्सव का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। राजवाड़ा से निकलने वाली इस गेर में इस बार मिसाइल जैसी मशीनों से 200 फीट तक रंग और पानी की बौछारें की जाएंगी।

पिछले तीन वर्षों से इस आयोजन में 5 लाख से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं, जिसके कारण यह देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में गिना जाने लगा है। इस बार भी लाखों लीटर पानी और हजारों किलो गुलाल उड़ाने की तैयारी की गई है।

राजवाड़ा और आसपास के करीब 5–6 किलोमीटर क्षेत्र में रंग, गुलाल और पानी की फुहारों से माहौल रंगीन रहेगा। खास आकर्षण के रूप में 8 हजार किलो टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक गुलाल से राजवाड़ा पर तिरंगा बनाया जाएगा।

गेर और फागयात्राएं शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलकर राजवाड़ा क्षेत्र में पहुंचेंगी। इसमें डीजे, ढोल-ताशे, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी शामिल रहेंगी।

अलग-अलग गेरों में खास आकर्षण

संगम कॉर्नर की 76वीं सामाजिक समरसता गेर में बरसाना की लट्ठमार होली और राधा-कृष्ण की रासलीला प्रस्तुत की जाएगी। यहां ‘पृथ्वी’ और ‘अग्नि’ नाम की विशेष मिसाइलों से सुगंधित गुलाल और गुलाब की पंखुड़ियां उड़ाई जाएंगी।

रसिया कॉर्नर की 53वीं गेर में करीब 40 वाहन, पानी के टैंकर और विशेष झांकियां शामिल होंगी। इसमें 10 ई-रिक्शा शहर के ई-सिटी नवाचार को दर्शाते हुए आगे चलेंगे और आदियोगी की झांकी भी दिखाई जाएगी।

मॉरल क्लब समिति की गेर में 6 डीजे, 51 ढोल, 15 ब्लोअर मशीनें और पानी के टैंकर शामिल होंगे, जबकि टोरी कॉर्नर की गेर में डीजे, बैंड, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और तीन टैंकरों से रंग-पानी की बौछारें की जाएंगी।

7 दशक में बदला गेर का स्वरूप

इंदौर में रंगपंचमी की गेर का इतिहास काफी पुराना है। इतिहासकार जफर अंसारी के अनुसार होल्कर शासन के समय भी राजवाड़ा क्षेत्र में रंगपंचमी पर बड़ी संख्या में लोग जुटते थे।

1947 से पहले यहां पुराने फायर ब्रिगेड यानी ‘लाइव बंबा’ से लोगों पर पानी डाला जाता था। बाद में 1950-60 के दशक में कड़ाव में साबुन का पानी भरकर लोगों पर डाला जाने लगा।

इंदौर की गेर की परंपरा करीब 70 साल पुरानी मानी जाती है। शुरुआती दौर में लोग बैलगाड़ियों में रंग और पानी लेकर निकलते थे और रास्ते में मिलने वालों पर रंग डालते थे। समय के साथ इसमें ट्रैक्टर-ट्रॉली, डीजे, पानी के टैंकर और अब आधुनिक रंग उड़ाने वाली मिसाइलें भी शामिल हो गई हैं।

आज इंदौर की रंगपंचमी गेर देशभर में अपनी अनोखी परंपरा और भव्यता के लिए जानी जाती है।रंगपंचमी के दिन निकलने वाली इंदौर की गेर को देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में से एक माना जाता है। हर साल इसे देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इंदौर पहुंचते हैं। रंग, संगीत और उत्साह से भरा यह आयोजन इंदौर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

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