राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित त्रेता युग का राम रामेश्वर मंदिर
संवाददाता
3 January 2026
अपडेटेड: 4:29 PM 0thGMT+0530
धौलपुर का प्रसिद्ध राम रामेश्वर मंदिर जो भगवान श्री राम के युग का यानि त्रेता युग का बताया जाता है ।यहां एक ऐसा शिवलिंग है जिसे स्वयंभू शिवलिंग कहा जाता है और एशिया के सबसे बड़े शिवलिंगों में गिना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहां दर्शन मात्र से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं ।महाशिवरात्रि ,श्रावण महीने में और हर सोमवार को यहां बड़ी संख्या में महादेव की भक्ति, पूजा अर्चना के लिए लोगआते हैं। यह मंदिर है राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित सैंपऊ महादेव मंदिर- जिसे राम रामेश्वर मंदिर भी कहा जाता है।वैसे तो धौलपुर जिले में कई प्राचीन मंदिर हैं । जिनका निर्माण धौलपुर रियासत के राजा – महाराजाओं ने करवाया था। उन्ही में से एक मंदिर है सैंपऊ महादेव मंदिर। यह मंदिर स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था का अदभुत केंद्र है इस मंदिर का निर्माण धौलपुर रियासत के दीवान राजधार कन्हैया लाल द्वारा कराया गया था। मान्यताओं के अनुसार यह शिवलिंग त्रेता युग का है जिसे भगवान श्री राम ने गुरु विश्ववामित्र के साथ यज्ञ के दौरान स्थापित किया था। मंदिर की दीवारों पर अनेक प्रकार के पशु पक्षियों का चित्रण किया गया है। भगवान की मूर्तियां भी बनाई गई है, और मंदिर के गर्भ ग्रह में पहुंचने के लिए चार दरवाजे हैं। इस महादेव मंदिर के पुजारी बताते हैं यह शिवलिंग भगवान श्री राम के युग का यानि त्रेता युग का है । यहां भगवान श्री राम ने अपने गुरु विश्वामित्र के साथ यहां यज्ञ किया था और महादेव के शिवलिंग का जलाभिषेक करके प्राण प्रतिष्ठा के साथ स्थापित किया था ।श्रतभी से इस मंदिर को राम रामेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।महादेव मंदिर के महंत बताते हैं कि यहीं पर गुरु विश्वामित्र के आदेश पर प्रभु श्री राम ने ताड़का का वध किया था। एक और भी यहां विशेष बात है -कि धौलपुर के महाराजा कीरत सिंह को महादेव के आशीर्वाद से पुत्र की प्राप्ति हुई इसलिए धौलपुर के महाराजा कीरत सिंह इस शिवलिंग को धौलपुर स्थित चोपड़ा मंदिर ले जाना चाहते थे । जब उन्होंने शिवलिंग को निकालने का प्रयास किया तो कई दिन तक खुदाई चलती रही, लेकिन शिवलिंग का अंतिम छोर दिखाई नहीं दिया । बाद में इस मंदिर का निर्माण महाराज कीरत सिंह के पुत्र भगवान सिंह के शासनकाल में हुआ। इस मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां पर एक बड़ा विशालकाय कुएं का निर्माण भी राजा भगवान सिंह जी ने करवाया था। इसके अलावा यहां पर एक ऐसा वृक्ष है जिसकी एक डाल पर तो फूल लगते हैं और एक डाली पर कांटे लगते हैं। इन दोनों डालियों को नर और मादा के रूप में जाना जाता है।यह मंदिर धौलपुर जिले से 30 किलोमीटर दूर सैंपल उपखंड में स्थित है । यह मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है ।क्षइस मंदिर की दीवारों पर पशु पक्षियों का चित्रण किया गया है । भगवान की मूर्तियां बनाई गई है और मंदिर के गर्भ ग्रह में पहुंचने के लिए चार दरवाजे बनाए गए हैं । माना जाता है कि इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।क्ष महाशिवरात्रि श्रावण मास और हर सोमवार को यहां बड़ी संख्या में भक्ति पूजा अर्चना करने आते हैं।