10 June 2026
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के बीच एक बहुत बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है। चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस पार्टी को एक तगड़ा झटका लगा है, जिससे उसकी पूरी चुनावी रणनीति धरी की धरी रह गई है। रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म रद्द कर दिया है। इसके बाद से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला और क्यों रद्द हुआ पर्चा?
दरअसल, यह पूरा विवाद भाजपा प्रत्याशी महेश केवट की एक आपत्ति के बाद शुरू हुआ। भाजपा उम्मीदवार ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने शिकायत दर्ज कराई थी कि कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र में एक बेहद जरूरी जानकारी छिपाई है। आरोप के मुताबिक, तेलंगाना में मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है, जिसकी जानकारी उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं दी थी।
रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और दस्तावेजों की जांच की। जांच में भाजपा के आरोपों को सही पाया गया, जिसके बाद नियमों के तहत तथ्यों को छुपाने के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म खारिज कर दिया गया। इसकी खबर मिलते ही कांग्रेस खेमे में सन्नाटा पसर गया, वहीं भाजपा इसे अपनी नैतिक जीत मान रही है।
बेंगलूरु जा रहे विधायकों के विमान को लेना पड़ा यू-टर्न
इस पूरी घटना का असर कांग्रेस विधायकों की हलचल पर भी देखने को मिला। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के डर और अपनी रणनीति के तहत कांग्रेस पार्टी अपने 72 विधायकों को विशेष चार्टर्ड विमान से बेंगलूरु भेजने की तैयारी कर चुकी थी। सभी विधायक विमान में बैठ भी चुके थे। लेकिन जैसे ही हवाई अड्डे पर यह खबर पहुंची कि उनकी मुख्य प्रत्याशी का नामांकन ही रद्द हो गया है, वैसे ही पूरी योजना को रोकना पड़ा और विधायकों को लेकर उड़ने वाले विमान को वापस होना पड़ा। इस घटनाक्रम के बाद विधायकों में भी असमंजस की स्थिति बन गई।
कांग्रेस का पलटवार: कोर्ट जाने की तैयारी
दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई गंभीर आपराधिक मामला नहीं है। उन्हें केवल एक सामान्य कानूनी नोटिस मिला था, जिसे भाजपा तिल का ताड़ बना रही है। कांग्रेस ने साफ किया है कि वे इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके साथ ही कांग्रेस का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग के पास भी पहुंच गया है। नामांकन रद्द होने के विरोध में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन कार्यालय के सामने जमकर नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन भी किया।
भाजपा का तंज और बाकी पार्टियों का रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस पर चुटकी ली है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी आपसी खींचतान और अंदरूनी कलह की वजह से पहले ही हार मान चुकी थी और रही-सही कसर राहुल गांधी के नेतृत्व में समन्वय की कमी ने पूरी कर दी।
इसी बीच, भारत आदिवासी पार्टी के इकलौते विधायक कमलेश्वर डोडियार के रुख ने भी सस्पेंस बढ़ा दिया है। उन्होंने अचानक अपने दोनों मोबाइल फोन बंद कर दिए हैं और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर साफ किया है कि वे अपनी आगे की रणनीति का खुलासा सीधे 18 जून को करेंगे, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया है।


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