राष्ट्रीय सम्मेलन में हुए कई निर्णय,:

khabar pradhan

संवाददाता

9 February 2026

अपडेटेड: 9:30 AM 0thGMT+0530

राष्ट्रीय सम्मेलन में हुए कई निर्णय,:



देश की अदालतों में 7 साल तक की सजा वाले केसों का निपटारा फास्ट ट्रैक से:

भोपाल की नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में चीफ जस्टिसों की दो दिन की कॉन्फ्रेंस हुई संपन्न हुई। इस कॉन्फ्रेंस में 25 हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसों ने हिस्सा लिया ।

नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में दो दिन का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
भोपाल की नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में 7 फरवरी से दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया है। जिसका शुभारम्भ शनिवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने किया।  इनके साथ देश के अलग-अलग राज्यों से 25 से अधिक हाईकोर्ट के जज भी  इस सम्मेलन में शामिल हुए।  जानकारी के अनुसार, यह सम्मेलन हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए आयोजित किया गया था।
देश की अदालतों में अब 7 साल तक की सजा वाले आपराधिक मामलों को प्राथमिकता देकर तेजी से निपटाने की राष्ट्रीय नीति अपनाई जाएगी। इससे लंबित मामलों का बोझ कम होगा। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी में दो दिनी मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन के आखिरी दिन रविवार को लिए कई फैसलों में यह अहम रहा।

सम्मेलन में न्याय व्यवस्था कों एकीकृत, प्रभावीऔर जन केंद्रित बनाने के लिए भी कई निर्णय लिए गए। इस पर भी सहमति बनी किं न्याय में देरी आम लोगों के विश्वास को कमजोर करती है। सम्मेलन में सीजेआइ सूर्यकांत समेत शीर्ष कोर्ट 9 न्यायाधीश व हाईकोर्ट के सभी 25 न्यायाधीश शामिल थे। सम्मेलन में मीडिया ट्रायल पर भी चिंता जताई गई। कहा गया, न्याय का फैसला कोर्ट में होना चाहिए, टीवी स्टूडियो में नहीं। मीडिया ट्रायल से निर्दोष व्यक्ति की छवि छवि खराब होती है और इसे रोकना जरूरी है।

डिजिटल व भाषाई समावेशनः

सम्मेलन में ई-कोर्ट, डिजिटल फाइलिंग और स्थानीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देकर न्याय को आम जनता के और करीब लाने का संकल्प लिया गया। सम्मेलन ने स्पष्ट संकेत दिया कि भारतीय न्याय व्यवस्था अब परंपरागप्त ढांचे से आगे आधुनिक, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल प्रणाली की ओर कदम बढ़ा रही है।

क्या हुए अहम फैसले:

1..7 साल तक की सजा वाले मामलों की फास्ट ट्रैक सुनवाई।

2..प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाने पर जोर।

3..न्यायालयीन प्रशासन को डेटा आधारित और रणनीतिक बनाने का निर्णय।

4..देशभर की अदालतों में एकरूपता लाने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नीति बनाने पर मंथन।

सरकार के अनावश्यक मुकदमों पर रोक:

चीफ जस्टिस ने इस पर गहरी चिंता जताई कि केंद्र और राज्य सरकारें बड़ी संख्या में अनावश्यक अपील और मुकदमे दायर कर रही है। इससे अदालतों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। न्यायाधीशों ने सुझाव दिया कि मुकदमा दायर करने से पहले कानूनी विवेक और सार्वजनिक हित का आकलन करें। जिन मामलों में कानून स्पष्ट है या पहले ही न्यायिक दृष्टांत मौजूद हैं, वहां अपील से बचना चाहिए।

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