सांदीपनि स्कूल का शर्मनाक रिजल्ट, 9वीं के 328 में से 241 छात्र फेल; 4 अतिथि शिक्षकों पर गिरी गाज
संवाददाता
6 April 2026
अपडेटेड: 4:00 PM 0thGMT+0530
6 अप्रैल 2026
विदिशा:
शिक्षा के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने और आधुनिक सुविधाओं का दावा करने वाले निजी स्कूलों की पोल खुल गई है। विदिशा जिले के लटेरी में स्थित प्रतिष्ठित सांदीपनि स्कूल में कक्षा नौवीं का परीक्षा परिणाम बेहद निराशाजनक रहा है। इस खराब रिजल्ट के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार अतिथि शिक्षकों को नौकरी से हटा दिया है और उन्हें ब्लैकलिस्ट भी कर दिया है।
शर्मनाक आंकड़े: 328 में से 241 छात्र फेल
आंकड़ों के अनुसार, सांदीपनि स्कूल में कक्षा 9वीं में कुल 328 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत थे। जब परीक्षा परिणाम जारी हुआ, तो स्थिति जानकर सभी हैरान रह गए। इनमें से मात्र 87 विद्यार्थी ही पास हो सके, जबकि 241 छात्र फेल हो गए हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल के एक सेक्शन (डी) के 91 में से 90 बच्चे फेल हो गए हैं। इस भयावह स्थिति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि विषयवार आंकड़ों पर नजर डालें तो विज्ञान में सर्वाधिक 222, गणित में 190, अंग्रेजी में 149, संस्कृत में 78, हिंदी में 65 और सामाजिक विज्ञान में 238 छात्र फेल हुए हैं।
कक्षा 9वीं और 11वीं का रिजल्ट जारी होने के बाद से ही लटेरी सांदीपनि स्कूल की इस खराब स्थिति को लेकर बवाल मच गया था। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एसपीएस जाटव ने प्राचार्य को नोटिस जारी कर जांच दल बनाया था। हालांकि, हफ्ते भर तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के बाद सिरोंज क्षेत्र के विधायक उमाकांत शर्मा ने मोर्चा संभाला। उन्होंने शिक्षा विभाग के आयुक्त को पत्र लिखकर प्राचार्य सहित अन्य दोषी शिक्षकों को हटाने की मांग की थी।
विधायक के पत्र के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और रविवार (अवकाश के दिन) ही जिला शिक्षा अधिकारी जाटव ने आदेश जारी कर सांदीपनि स्कूल लटेरी में कार्यरत चार अतिथि शिक्षकों को हटा दिया। हटाए गए शिक्षकों के नाम हैं महेंद्र शर्मा , उन्नति , हफ्ज़ान , कीर्तिश यादव
शिक्षा विभाग ने इन चारों शिक्षकों को न केवल नौकरी से हटाया है, बल्कि आगामी समय में किसी भी स्कूल में नियुक्त न करने के लिए उन्हें ब्लैकलिस्ट भी कर दिया है। यह कार्रवाई निजी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और उनके द्वारा सुविधाओं के नाम पर लिए जा रहे भारी-भरकम फीस पर सवाल खड़े करती है।