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तमिलनाडु
पिछले सात सालों से तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रमुख चेहरा रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने आखिरकार भाजपा का दामन छोड़ दिया है. शुक्रवार को वह भाजपा की जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त हो गए. भाजपा का साथ छोड़ते ही अन्नामलाई ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने का भी बड़ा ऐलान कर दिया है, जिससे राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है.
आइए विस्तार से समझते हैं कि अन्नामलाई का यह कदम तमिलनाडु की राजनीति को किस तरफ ले जा रहा है:

सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दी जानकारी:
अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो मैसेज जारी करते हुए अपने इस बड़े फैसले की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आज से हम एक नए आंदोलन की शुरुआत करने जा रहे हैं. उन्होंने एलान किया कि उनकी यह नई राजनीतिक पार्टी तमिलनाडु में साल 2031 में होने वाला अगला विधानसभा चुनाव पूरी मजबूती के साथ लड़ेगी.
राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्होंने अचानक भाजपा क्यों छोड़ी? क्या यह भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की किसी अंदरूनी रणनीति का हिस्सा है या फिर अन्नामलाई ने अपने दम पर अलग राह चुनने का फैसला किया है?

थलपति विजय के लिए कितनी बड़ी चुनौती?
अन्नामलाई के इस तरह अकेले चुनावी मैदान में उतरने से सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि वह वहां के मौजूदा राजनीतिक माहौल में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (अभिनेता थलपति विजय) के लिए कितनी बड़ी चुनौती साबित होंगे. जानकारों का मानना है कि तमिलनाडु की भविष्य की राजनीति अब थलपति विजय के फिल्मी स्टारडम और अन्नामलाई की जमीनी ताकत, युवा ऊर्जा और उनकी राजनीतिक सोच के इर्द-गिर्द घूमेगी.
जहाँ एक तरफ थलपति विजय ने अपनी फिल्मी पहचान के दम पर पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को काफी हद तक हाशिए पर धकेलने का काम किया है, वहीं दूसरी तरफ अन्नामलाई के पास जनता को पिछले कुछ दशकों की पुरानी राजनीति से उबारकर एक नया भविष्य देने का मौका है.

जनता के बीच अन्नामलाई की अपनी लोकप्रियता
अन्नामलाई के पास भाजपा जैसे देश के सबसे बड़े सियासी संगठन के साथ सात साल तक जमीनी स्तर पर काम करने का एक लंबा अनुभव है. भाजपा में रहने के कारण उन्हें न सिर्फ पूरे तमिलनाडु में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ी पहचान मिल चुकी है.
खासकर राज्य के युवाओं, शहरी मध्यम वर्ग और महिला वोटरों के बीच अन्नामलाई को लेकर एक अलग ही क्रेज देखने को मिलता है. सबसे खास बात यह है कि जब वह सड़कों से गुजरते हैं, तो उनके प्रति आम जनता का जो जुड़ाव और सहज आकर्षण दिखता है, उसमें किसी फिल्मी चमक-दमक की जरूरत नहीं पड़ती. उनके पास पिछले सात सालों से लगातार आम जनता के बीच रहकर काम करने का जमीनी अनुभव है, जो इस नए सियासी सफर में उनकी सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है.


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