16 June 2026 :
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म होने की ओर बढ़ता दिख रहा है,……उम्मीद की जा रही है अब जल्द ही सबकुछ ठीक हो जायेगा…..भारत में भी इसका असर देखा जा रहा था…… अगर जंग खत्म होती है तो जाहिर है भारत को भी राहत मिलेगी।
आईए जानते हैं जंग खत्म होने के बाद भारत को क्या क्या फायदा मिलने जा रहा है। करीब 4 महीने से ज्यादा समय तक चले तनाव और टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा की गई है,……अब एक उम्मीद की किरण नज़र आ रही है,….. ये समझौता 19 जून को जिनेवा में साइन किया जाना है,…..दोनों देश 107 दिन पुराने संघर्ष को खत्म करने पर सहमत हो गए हैं,….इस टकराव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं था।
इसकी वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई, कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और पश्चिम एशिया में बड़े संकट की आशंकाएं पैदा हो गई थीं। एक समय ऐसा भी आया जब crude oil की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी। अब शांति समझौते की घोषणा के बाद भारत को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर पश्चिम एशिया पर निर्भर है। ऐसे में क्षेत्र में स्थिरता आने का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है ।
PTI ने GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के मुताबिक बताया कि भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। इसके अलावा एलपीजी की करीब 70 प्रतिशत और एलएनजी की लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति भी इसी क्षेत्र से होती है। ऐसे में जब क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो भारत की ऊर्जा लागत भी बढ़ जाती है। टकराव के दौरान खाड़ी क्षेत्र से शिपिंग और सप्लाई प्रभावित हुई थी । इससे भारत का आयात बिल बढ़ा, महंगाई का दबाव बढ़ा और रुपये पर भी असर पड़ा। कई भारतीय रिफाइनरियों को वैकल्पिक बाजारों से तेल खरीदने के विकल्प तलाशने पड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अब यदि शांति समझौता सफल रहता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होती है, तो वैश्विक तेल और गैस बाजार में स्थिरता लौट सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा और भारत के लिए ऊर्जा आयात सस्ता पड़ सकता है। इसका एक और बड़ा असर भारत के व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है।
खाड़ी देशों के साथ भारत का व्यापार काफी बड़ा है भारत वहां इंजीनियरिंग उत्पाद, पेट्रोलियम उत्पाद, Food Material , कृषि उत्पाद, चावल, Gems and Jewellery, medicines ,.. कपड़े और मशीनरी जैसी वस्तुओं का निर्यात करता है, वहीं दूसरी ओर भारत खाड़ी देशों से कच्चा तेल, एलएनजी, एलपीजी, पेट्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और अन्य ऊर्जा उत्पाद आयात करता है। ऐसे में क्षेत्र में शांति का माहौल व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती दे सकता है। शांति समझौते की खबर का असर Financial market में भी दिखाई दिया। तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, शेयर बाजारों में सकारात्मक माहौल बना और भारतीय रुपये को भी मजबूती मिली।
Brent crude की कीमत में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली और यह 83 से 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।क्ष वहीं रुपये ने भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखा । विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शांति लंबे समय तक कायम रहती है, तो भारत का आयात बिल कम हो सकता है, महंगाई पर दबाव घट सकता है और आर्थिक विकास के लिए बेहतर माहौल तैयार हो सकता है। यानी अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला यह समझौता सिर्फ दो देशों के रिश्तों की कहानी नहीं है, बल्कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए भी राहत और नए अवसरों का संकेत माना जा रहा है।


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