22 मई 2026
वाशिंग्टन:
पाकिस्तान करा रहा है दोनों देशों के बीच मध्यस्थता, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- बातचीत के लिए कुछ दिन और कर सकते हैं इंतजार
वाशिंगटन और तेहरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब थोड़ा कम होता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि उन्होंने ईरान के खिलाफ होने वाली सैन्य कार्रवाई को फिलहाल के लिए टाल दिया है। ट्रंप का मानना है कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और शांति समझौते की पूरी संभावना है। दूसरी तरफ, ईरान की राजधानी तेहरान में भी अमेरिकी शांति प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उन्हें अमेरिका का नया प्रस्ताव मिल गया है और वे इस पर गंभीरता से अध्ययन कर रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख भी बरकरार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए कहा कि वे बातचीत के जरिए हल निकालने के लिए कुछ दिन और इंतजार करने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने साफ शब्दों में यह चेतावनी भी दी है कि अगर दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका पीछे नहीं हटेगा और ईरान के खिलाफ आगे इससे भी ज्यादा विनाशकारी सैन्य कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ जारी यह विवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा।
परमाणु कार्यक्रम पर अड़ा ईरान
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की सबसे बड़ी शर्त यही है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हट जाए। लेकिन ईरान इस मुद्दे पर अब भी ना-नुकुर कर रहा है और पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है। बीते कुछ हफ्तों में दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन ईरान के अड़ियल रुख के कारण अब तक कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आ सका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि दोनों देशों के बीच फिलहाल एक अस्थायी युद्धविराम बना हुआ है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयास
इस गंभीर माहौल में दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान बहुत सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के माध्यम से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत का सिलसिला जारी है। पाक सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस मध्यस्थता के तहत जल्द ही तेहरान की यात्रा करने वाले हैं, जबकि इससे एक दिन पहले ही पाकिस्तान के गृह मंत्री भी ईरान का दौरा करके लौटे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान को डर है कि अगर यह बातचीत लंबी खिंची तो राष्ट्रपति ट्रंप का धैर्य खत्म हो सकता है, इसलिए वह बातचीत को जल्द से जल्द किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंचाना चाहता है।
दुनिया भर की नजरें और आर्थिक चिंताएं
इस टकराव का सीधा असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर देखने को मिल रहा है। युद्ध के डर से इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पहले की तुलना में काफी कम हो गई है और शिपिंग ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जानकारों का कहना है कि अगर यह बातचीत फेल होती है, तो पश्चिम एशिया के हालात बेहद गंभीर हो जाएंगे। इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान युद्ध का रास्ता छोड़कर शांति समझौते पर सहमत हो पाते हैं या नहीं।


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