12 June 2026
भारतीय रक्षा क्षेत्र और उद्योग जगत से देश को गर्व महसूस कराने वाली एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। करीब एक वर्ष पहले हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत की रणनीतिक सोच और सेना की ताकत में एक चमत्कारी बदलाव देखने को मिल रहा है। आज भारतीय सेना, सरकार और देश के स्टार्टअप्स ने मिलकर एक ऐसा मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया है, जो देश की सीमाओं को अभेद्य बनाने के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार दे रहा है।
एक समय था जब रात के समय टीवी स्क्रीन पर रोशनी के गुच्छों की तरह दिखने वाले पाकिस्तानी जासूसी ड्रोन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम और सामरिक ठिकानों की टोह लेने के लिए भारतीय सीमा में घुस आते थे। हालांकि, देश के मजबूत इंटीग्रेटेड डिफेंस सिस्टम के आगे वे कभी अपने नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अब भारत के अपने खतरनाक आत्मघाती (कामीकेज) ड्रोनों ने लाहौर से लेकर कराची तक पाकिस्तान के पूरे एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से बौना साबित कर दिया है।
देश में हर रोज बन रहे हैं दो हजार से ज्यादा घातक ड्रोन
रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को यह अच्छी तरह समझा दिया था कि ड्रोन भविष्य के युद्ध का सबसे घातक और निर्णायक हथियार है। इसी बात को भांपकर भारत ने ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भर होने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। आज देश में करीब 600 घरेलू कंपनियां और 100 से ज्यादा स्टार्टअप्स मिलकर ड्रोन का एक बेहद मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर चुके हैं।
इस जबरदस्त तालमेल का नतीजा यह है कि आज भारतीय कंपनियां हर रोज दो हजार से भी अधिक हमलावर ड्रोन बनाने की क्षमता हासिल कर चुकी हैं। स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियों का ध्यान अब सिर्फ भारतीय सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनकी नजर अब बहुत जल्द दुनिया के वैश्विक मार्केट पर टिकी है। रक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारतीय कंपनियां अब क्रिटिकल ड्रोन टेक्नोलॉजी में पूरी तरह महारत हासिल कर चुकी हैं।
20 हजार करोड़ की सरकारी खरीद से घरेलू कंपनियों को लगेगा पंख
ड्रोन फेडरेशन इंडिया के प्रेसिडेंट स्मित शाह का कहना है कि किसी भी उद्योग का विकास उसकी मांग से सीधे तौर पर जुड़ा होता है। पहले हमारी सेनाओं की तरफ से घरेलू कंपनियों को उस पैमाने पर ऑर्डर नहीं मिल पा रहे थे, जिससे बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू किया जा सके। लेकिन अब सरकार की नीतियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
नोएडा की मशहूर ड्रोन निर्माता कंपनी आईजी डिफेंस के को-फाउंडर बोधिसत्व सांगप्रिया ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के समय उनकी कंपनी महीने भर में करीब 200 हमलावर ड्रोन बनाती थी, जबकि आज वे हर रोज 200 ऐसे ड्रोन बनाने में सक्षम हैं। उन्होंने अब तक भारतीय सेनाओं को लगभग 5,000 हमलावर ड्रोनों की आपूर्ति भी कर दी है।
सांगप्रिया ने आगे बताया कि सरकार की नई नीतियों के तहत यूपी डिफेंस कॉरिडोर में उनकी कंपनी को एक एकड़ जमीन मिली है, जिससे काम को और रफ्तार मिलेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार अब घरेलू कंपनियों से करीब 20,000 करोड़ रुपये के ड्रोन खरीदने की तैयारी में है। इस भारी-भरकम बजट का सीधा फायदा देश की अपनी कंपनियों को मिलेगा, जिससे उनकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में अभूतपूर्व विस्तार होगा।
आईजी डिफेंस का नया ड्रोन: 1,000 किलोमीटर रेंज और जीपीएस जैमिंग प्रूफ
भारतीय कंपनियों द्वारा तैयार किए जा रहे ड्रोन तकनीक के मामले में दुनिया के किसी भी आधुनिक ड्रोन से कम नहीं हैं। आईजी डिफेंस द्वारा बनाया गया नया कामीकेज (आत्मघाती) ड्रोन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसकी खूबियां हैरान करने वाली हैं:
लंबी दूरी की मारक क्षमता: यह खतरनाक ड्रोन 1,000 किलोमीटर की रेंज तक जाकर दुश्मन का सफाया करने में पूरी तरह सक्षम है।
भारी पेलोड क्षमता: यह अपने साथ 50 किलोग्राम तक का विस्फोटक या पेलोड ले जा सकता है, जो ईरान के मशहूर ‘शाहेद ड्रोन’ की तरह ही बेहद विनाशकारी साबित होता है।
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से सुरक्षा: इस ड्रोन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि दुश्मन का कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इसे हैक या गुमराह नहीं कर सकता। यह पूरी तरह से ‘जीपीएस डिनायल’ और ‘जैमिंग प्रूफ’ तकनीक से लैस है।
आज भारत के पास बड़ी संख्या में ड्रोन बनाने के लिए एक बेहतरीन और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम मौजूद है। ड्रोन निर्माण के इस क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता अब बहुत दूर नहीं है, जो आने वाले समय में देश को रक्षा निर्यात के मामले में भी एक बड़े वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी।


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