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22 मई 2026

नई दिल्ली:
अमेरिका के बोस्टन से पढ़ाई कर रहे अभिजीत ने शुरू किया नया अभियान, फॉलोअर्स की संख्या 1.5 करोड़ के पार
आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व सोशल मीडिया रणनीतिकार अभिजीत दीपके एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अमेरिका के बोस्टन स्थित बोस्टन यूनिवर्सिटी से जनसंपर्क (पब्लिक रिलेशंस) की पढ़ाई कर रहे अभिजीत ने 16 मई 2026 को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक नए डिजिटल राजनीतिक मंच की घोषणा की है। इंटरनेट पर आते ही इस अनोखे नाम वाले मंच ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से मिला इस नाम का आइडिया
दरअसल, इस अनोखे नाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। 15 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान फर्जी डिग्री के सहारे शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पाने वाले कुछ लोगों की तुलना ‘कॉकरोच’ से की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने स्थिति साफ करते हुए कहा था कि उनका यह बयान देश के आम युवाओं के संदर्भ में बिल्कुल नहीं था। लेकिन तब तक ‘कॉकरोच’ शब्द इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर इस शब्द को लेकर मीम्स, अभियान और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। इसी माहौल के बीच अगले ही दिन अभिजीत ने इस डिजिटल मंच की शुरुआत कर दी।

सोशल मीडिया पर मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स
अभिजीत दीपके का यह डिजिटल अभियान शुरू होते ही इंटरनेट पर छा गया है। इंस्टाग्राम समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस मंच से जुड़ने वाले लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। आंकड़ों की मानें तो इस नए डिजिटल मंच के फॉलोअर्स की संख्या 1.5 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। बड़ी संख्या में देश के युवा इस अभियान से प्रभावित होकर इसके साथ जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।

राजनीतिक हलकों में छिड़ी बहस
इस डिजिटल आंदोलन के शुरू होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश में बैठकर भारत की राजनीति से जुड़ा ऐसा डिजिटल आंदोलन खड़ा करना कई तरह के सवाल खड़े करता है। कुछ जानकारों ने तो इसे सोशल मीडिया आधारित ‘टूलकिट राजनीति’ का एक नया रूप तक करार दिया है। अब देखना यह होगा कि सोशल मीडिया पर इतनी तेजी से लोकप्रिय हो रहा यह मंच आने वाले समय में वास्तविक राजनीति पर कोई ठोस प्रभाव छोड़ पाता है, या फिर केवल एक डिजिटल चर्चा बनकर ही शांत हो जाता है।


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