4 मई 2026
खंडवा:

मध्य प्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली पवित्र नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने एक बहुत ही सराहनीय और अनोखी पहल शुरू की है। अब ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में होने वाली प्रतिदिन की भव्य महाआरती में मिट्टी या प्लास्टिक के सामानों के बजाय आटे से बने दीपकों का उपयोग किया जा रहा है। यह कदम धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश दे रहा है।
जलीय जीवों के लिए वरदान बनी यह पहल
खंडवा कलेक्टर अनय द्विवेदी (पूर्व में ऋषय गुप्ता) के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस पहल का सबसे बड़ा फायदा नदी में रहने वाले जीवों को मिल रहा है। प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने इसके पीछे के फायदों को विस्तार से समझाया है:
*आटे के दीपक जब विसर्जित होकर जल में घुलते हैं, तो वे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए पौष्टिक भोजन बन जाते हैं।
*पहले उपयोग होने वाले प्लास्टिक, थर्माकोल या अन्य कृत्रिम सामग्रियों से नदी का पानी प्रदूषित होता था और गंदगी फैलती थी, जो अब पूरी तरह बंद हो जाएगी।
*आटे और घी के दीपक पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं, जिससे जल की शुद्धता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।
महिला सशक्तिकरण को मिला बढ़ावा
यह पहल केवल पर्यावरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोले हैं। ओंकारेश्वर की ‘महिला आजीविका मिशन’ से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाएं इन दीपकों को तैयार कर रही हैं।
1. रोजगार के अवसर: ग्रामीण महिलाओं को आटे के दीपक बनाने का व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक मदद दी गई है।
2. आत्मनिर्भरता: इस काम से महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं और अपने परिवार की मदद कर पा रही हैं।
हरिद्वार और ऋषिकेश की तर्ज पर महाआरती
ओंकारेश्वर में मां नर्मदा के तट पर होने वाली यह महाआरती अब हरिद्वार और ऋषिकेश जैसी भव्यता ले रही है। प्रतिदिन शाम को होने वाली इस आरती में देश-विदेश से आने वाले सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं। अब वे भी इस पर्यावरण-हितैषी पहल का हिस्सा बनकर पुण्य लाभ कमा रहे हैं।
कलेक्टर ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और मां नर्मदा की पवित्रता को बनाए रखना है। प्लास्टिक और थर्माकोल जैसी हानिकारक वस्तुओं को नदी में जाने से रोकना अब इस मिशन का सबसे बड़ा लक्ष्य है।