4 मई 2026
वाशिंगटन:
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक नए मोड़ पर आ गया है। ईरान की ओर से युद्ध खत्म करने के लिए दिए गए एक नए प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संदेह की नजर से देखा है। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने कोई भी गलत कदम उठाया या दोबारा सैन्य उकसावा किया, तो अमेरिका एक बड़ा और निर्णायक हमला करने से पीछे नहीं हटेगा।
क्या है ईरान का 14 सूत्रीय प्रस्ताव
ईरान ने तनाव कम करने के लिए अमेरिका के सामने 14 बिंदुओं वाला एक शांति प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
* एक महीने के भीतर ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए फिर से खोलना।
* ईरान पर लगी अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी को हटाना।
* ईरान ने यह भी कहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत तभी शुरू करेगा जब उस पर से प्रतिबंध हटेंगे और स्थायी युद्धविराम लागू होगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले 47 सालों में जो किया है, उसकी उसने अभी पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। ट्रंप प्रशासन फिलहाल कूटनीतिक रास्तों के साथ-साथ सैन्य तैयारियों पर भी जोर दे रहा है।
सहयोगी देशों को हथियारों की बड़ी खेप की मंजूरी
मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते खतरे को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने एक और बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की सामान्य समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अपने मित्र देशों को 8.6 अरब डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दे दी है।
इस फैसले के तहत:
* सऊदी अरब को ‘पैट्रियट मिसाइल सिस्टम’ और उन्नत सटीक हथियार मिलेंगे।
* संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और इजराइल को भी आधुनिक हथियार और युद्धक सिस्टम दिए जाएंगे।
* अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस फैसले को ‘आपातकालीन स्थिति’ बताते हुए सही ठहराया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए इन देशों की सुरक्षा क्षमता को बढ़ाना बहुत जरूरी है।
कूटनीति और सैन्य घेराबंदी एक साथ
हालांकि पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान और अन्य माध्यमों से अमेरिका और ईरान के बीच ‘बैक-चैनल’ बातचीत चल रही है, लेकिन हालात अभी भी सामान्य नहीं हैं। एक तरफ जहां बातचीत की कोशिशें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी समझौते के लिए जल्दबाजी में नहीं हैं और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे।
अमेरिका का यह सख्त रुख बताता है कि वह ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।


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