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5 जून 2026: खबर प्रधान डेस्क:

वैश्विक स्तर पर मचे उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों की अनिश्चितता के बीच, भारत अब अपने पुराने तेल आपूर्तिकर्ता देश वेनेजुएला की तरफ देख रहा है। इस दिशा में एक बड़ी प्रगति तब देखने को मिली जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंधों को और व्यापक रूप देने पर सहमति बनी है।

अमेरिका के प्रतिबंधों के चलते भारत को नए विकल्पों की तलाश:
दरअसल, जनवरी 2026 में अमेरिका ने वेनेजुएला में हुए सत्ता परिवर्तन में हस्तक्षेप करते हुए रोड्रिग्ज को कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता दी थी। इसके बाद से भारत ने वेनेजुएला से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की खरीद दोबारा शुरू कर दी है। वर्तमान में वेनेजुएला भारत को तेल सप्लाई करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है।
लेकिन इस व्यापार के सामने एक बड़ी चुनौती है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को जो छूट दी हुई थी, वह 17 जून 2026 को समाप्त होने जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने संसद में यह साफ कर दिया है कि भारत को मिली यह छूट जल्द ही खत्म हो जाएगी। ऐसे में भारत को रूस के विकल्प के तौर पर किसी मजबूत साथी की तलाश है, ताकि देश में तेल की किल्लत न हो। विदेश मंत्रालय का भी यही मानना है कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था और जनता के हितों को ध्यान में रखकर ही फैसले लेगा।

वेनेजुएला क्यों है भारत के लिए बेहद जरूरी?
भारत अपनी तेल की कुल जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इसमें से करीब 60 प्रतिशत तेल पश्चिम एशियाई देशों से आता है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और तनाव की वजह से न सिर्फ कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, बल्कि सप्लाई चेन पर भी बुरा असर पड़ा है। ऐसे में वेनेजुएला भारत के लिए एक भरोसेमंद और बड़ा जरिया बनकर उभरा है।
आंकड़ों की बात करें तो मई 2026 में भारत ने वेनेजुएला से हर दिन करीब 4 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इस बैठक के बाद भारत और वेनेजुएला के बीच कच्चे तेल की खरीद को लेकर लंबी अवधि (लॉन्ग टर्म) के समझौते पर बातचीत शुरू हो गई है।

सिर्फ तेल ही नहीं, इन क्षेत्रों में भी बढ़ेगा सहयोग:
विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने इस मुलाकात को लेकर बताया कि वेनेजुएला की राष्ट्रपति ने भारत को अपना सबसे पसंदीदा पार्टनर बताया है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए भारत आने वाले कई वर्षों तक ऊर्जा बाजार में एक स्थिर और बड़ा खरीदार बना रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारत इस ऊर्जा रिश्ते को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह उत्सुक है। तेल के अलावा दोनों नेताओं के बीच कई और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • दुर्लभ खनिज (Rare Minerals) की खोज और सप्लाई
  • फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां और मेडिकल क्षेत्र)
  • कृषि क्षेत्र में नई तकनीक का आदान-प्रदान
  • ऑटोमोबाइल सेक्टर में आपसी सहयोग
  • दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना
    इस बैठक से साफ है कि भारत किसी भी दबाव में आए बिना अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और वेनेजुएला के साथ यह नई साझेदारी देश के विकास को एक नई रफ्तार देगी।

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