17 मई 2026.
नई दिल्ली
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने देश में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। एजेंसी ने भारत में पहली बार ‘जिहादी ड्रग’ के नाम से कुख्यात ‘कैप्टागन’ टैबलेट और पाउडर की एक बहुत बड़ी खेप पकड़ी है। इस कार्रवाई के साथ ही एनसीबी ने एक अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
यह पूरी कार्रवाई ‘ऑपरेशन रेजीपॉल’ के तहत की गई है, जिसमें करीब 182 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट और पाउडर जब्त किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 227.7 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस पूरे मामले में भारत में अवैध रूप से रह रहे एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एनसीबी की इस बड़ी कामयाबी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई मोदी सरकार की नशीले पदार्थों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का एक मजबूत उदाहरण है।
कैसे जाल बिछाकर पकड़ा गया आरोपी?
एनसीबी को एक विदेशी ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसी से एक गुप्त सूचना मिली थी। जानकारी में बताया गया था कि भारत को एक ट्रांजिट पॉइंट (रास्ते का पड़ाव) बनाकर पश्चिमी एशियाई देशों में कैप्टागन की तस्करी करने वाला एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय है।
इस इनपुट के आधार पर एनसीबी ने तुरंत एक्शन लिया और दिल्ली के नेब सराय इलाके में एक घर की पहचान की। जब 11 मई 2026 को उस मकान की तलाशी ली गई, तो वहां चपाती काटने (रोटी बनाने) वाली मशीन के भीतर छिपाकर रखी गई करीब 31.5 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट बरामद हुई।
शुरुआती जांच में पता चला कि इस खेप को सऊदी अरब के जेद्दा भेजा जाना था। जांच में यह भी सामने आया कि मकान में रह रहा सीरियाई नागरिक 15 नवंबर 2024 को टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था, लेकिन 12 जनवरी 2025 को वीजा खत्म होने के बाद भी वह अवैध रूप से यहीं रह रहा था।
पूछताछ के बाद गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर एक्शन
पकड़े गए सीरियाई नागरिक से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने एक और बड़ा राज उगला। उसकी दी गई जानकारी के आधार पर एनसीबी ने 14 मई को गुजरात के मुंद्रा में स्थित एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन पर छापा मारा। वहां एक कंटेनर से करीब 196.2 किलोग्राम कैप्टागन पाउडर बरामद किया गया। आपको बता दें कि कैप्टागन में मुख्य रूप से फेनेथिलाइन और एम्फ़ैटेमिन जैसे प्रतिबंधित नशीले पदार्थ पाए जाते हैं।
साल 2025 में भी एनसीबी ने जब्त की थी भारी मात्रा में ड्रग्स
एनसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, ड्रग्स के खिलाफ उनकी यह मुहिम लगातार जारी है। इससे पहले साल 2025 में एनसीबी ने मुंबई से 349 किलोग्राम हाई ग्रेड कोकीन जब्त की थी, जिसकी कीमत करीब 1745 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा एक अन्य अभियान में एजेंसी ने 200 करोड़ रुपये मूल्य की कोकीन, गांजा और अन्य नशीले पदार्थ भी बरामद किए थे।
अगर साल 2025 के कुल आंकड़ों पर नजर डालें, तो एजेंसी ने अलग-अलग 447 अभियानों में 1980 करोड़ रुपये की कुल 1.33 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त की थी। इन मामलों में करीब 994 तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया था।
आखिर क्या है ‘कैप्टागन’ और इसे ‘जिहादी ड्रग’ क्यों कहते हैं?
कैप्टागन एक सिंथेटिक उत्तेजक (स्टिमुलेंट) दवा है, जिसे शुरुआत में यानी साल 1960 में मानसिक विकारों और नार्कोलेप्सी जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बनाया गया था। लेकिन बाद में इसके नशे की लत लगाने वाले गुणों और बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित कर दिया गया।
यह ड्रग इंसान को लंबे समय तक जगाए रखती है, उसकी थकान मिटा देती है और बिना सोचे-समझे आक्रामकता तथा बड़ा जोखिम उठाने की प्रवृत्ति को बढ़ा देती है। इसी वजह से पश्चिम एशिया के संघर्षग्रस्त इलाकों में लड़कों, चरमपंथियों और आतंकवादियों के बीच इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल होने लगा। आतंकवादी संगठन इसका उपयोग अपने लड़ाकों को निडर और हिंसक बनाए रखने के लिए करते हैं, जिसके कारण इसे ‘जिहादी ड्रग’ का नाम दिया गया है।


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