27 अगस्त 2026 :
देश दुनिया /नेपाल/
एक पल में सब कुछ पानी में समा गया ।ताश के पत्तों की तरह गाड़ियां मलबे के साथ बहती चली गई और लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला ।नेपाल में आए अचानक बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई जिसमें अब तक कम से कम 95 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी और सैकड़ो लोग लापता है। इनमें 100 से ज्यादा भारतीय भी शामिल है सबसे ज्यादा तबाही नेपाल की रुसवा जिले में देखने को मिली । अचानक रास्ते में आने वाली चीज देखते ही देखते बहती चली गई। इस आपदा का असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है । नेपाल टूर आईएसएम बोर्ड के संपर्क से बाहर इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं । कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले और बाढ़ की चपेट में आने के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। चीन के तिब्बत वाले एरिया में हालात गंभीर बताई जा रहे हैं।
सरकारी मीडिया के मुताबिक इलाके में तीन लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता है । यानी इस बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ भारी तबाही छोड़ गई है।
सबसे डराने वाली बात है बारिश की वजह से शुरुआती वैज्ञानिकों के एक बड़े हिस्से के सबसे डराने वाली बात है कि यह बाढ़ सामान्य बारिश की वजह से आई बाढ़ नहीं बताई जा रही। शुरुआती वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक पहाड़ के एक बड़े हिस्से के ग्लेशियर के ढहने से अचानक भारी मात्रा में पानी बर्फ और मालवा नदी में आ गया। और नदी ने खतरनाक रूप धारण कर लिया।
त्रिशूली नदी के आसपास खतरा बना हुआ है। बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। सेना पुलिस लोगों की तलाश में जुटी । लेकिन कई सड़क और पुल टूट जाने से राहत टीमों के सामने भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। नेपाल में सुरक्षाकर्मी समेत कई हाइड्रो पावर कर्मचारियों के बीच संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल से सामने आई तस्वीर सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा की कहानी नहीं है बल्कि उस तबाही की गवाही है जहां कुछ मिनट में जिंदगी और पूरा बुनियादी ढांचा समाप्त हो जाता है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। और लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
नेपाल में त्रासदी की वजह बारिश नहीं है। वजह 3 मिनट के अंतराल पर एक के बाद एक कई घटनाएं हुई हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार, तिब्बती क्षेत्र में सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। 3 मिनट बाद नेपाल सीमा पर ‘आइस एवलॉन्च’ यानी बर्फीला हिमस्खलन हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों से साफ हुआ है कि, ग्लेशियर से 2,000 फीट चौड़ा बर्फ का टुकड़ा टूटकर 17,000 फीट की ऊंचाई से गिरा। जहां यह गिरा, वहां बम विस्फोट जैसा गड्डा हो गया और ल्हेंदे नदी में पानी जमा होकर अस्थायी झील बन गई। पानी का दबाव बढ़ते ही यह झील टूटी और पानी, बर्फ व मलबे का सैलाब तेजी से नीचे आया। यह जबर्दस्त ताकत के साथ उत्तर-पश्चिम दिशा में नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित भोटेकोशी नदी की ओर बढ़ा।
सैटेलाइट तस्वीरों में एक दिन पहले बर्फ की परत तेजी से गायब होती दिखाई दी है। यह तापमान बढ़ने से, ग्लेशियर के पिघलने से या आइस एवलॉन्च के कारण हो सकता है।
फ्रांस के भू-आकृति विशेषज्ञ को भूकंपीय उपकरणों के डेटा में सुबह 8:40 बजे अचानक बहुत बड़ा हिस्सा खिसकने के संकेत मिले हैं। इसके बाद एक ‘फ्लो सिग्नल’ दर्ज किया गया, जो बाढ़ आने का संकेत देता है।
वैज्ञानिक विश्लेषण कर रहे हैं कि भूकंप एवलॉन्च की वजह से आया या एवलॉन्च की वजह से भूकंप ।
ल्हेंदे नदी में 14 महीने में दूसरी बड़ी बाढ़ है। 8 जुलाई 2025 की बाढ़ को उपग्रह तस्वीरों के आधार पर ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट से जोड़ा गया था। नेपाल में भारी बारिश इस बार वजह नहीं है, क्योंकि रसुवा में मंगलवार को बारिश नहीं हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने हर संभव मदद का दिया आश्वासन:
भारत इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्दु शाह से बातचीत की है और हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है । भारत के तरफ से राहत सामग्री भी भेजी गई है ।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस भारी जनहानि पर दुख जताया है। सरकार ने लोगों से नदियों को किनारे जाने से रोक लगाई है। और लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा है।


Leave a Reply