21 अप्रैल 2026
नोएडा/नई दिल्ली:
नोएडा में हाल ही में फैक्ट्री मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि वह हिंसा कोई अचानक हुआ हादसा नहीं थी, बल्कि उसके पीछे महीनों से रची जा रही एक गहरी साजिश थी। आंदोलन की आड़ में शहर का माहौल बिगाड़ने का पूरा खाका पहले ही तैयार कर लिया गया था।
तमिलनाडु से पकड़ा गया मुख्य संदिग्ध
इस पूरी साजिश के पीछे जिस व्यक्ति का हाथ बताया जा रहा है, उसका नाम आदित्य आनंद है। पुलिस ने उसे तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि आदित्य जून 2025 से नोएडा में रह रहा था, जबकि उससे पहले वह गुरुग्राम में रहता था। उसने नोएडा में एक किराए का फ्लैट लिया था, जिसे इस साजिश को अंजाम देने के लिए हेडक्वार्टर की तरह इस्तेमाल किया गया। आदित्य खुद को एक बड़ी आईटी कंपनी जेनपैक्ट से जुड़ा हुआ बताता था।
साजिश का ब्लूप्रिंट बरामद
नोएडा के अरुण विहार में हुई छापेमारी के दौरान पुलिस को कई ऐसे प्रिंटेड दस्तावेज मिले हैं, जो इस हिंसा की पूरी प्लानिंग की गवाही देते हैं। इन कागजों में हर छोटी से छोटी बात का जिक्र है। जांच में पता चला है कि यह साजिश किसी एक संगठन की नहीं थी, बल्कि कई अलग-अलग संगठन आपस में मिलकर एक साझा एजेंडे पर काम कर रहे थे। ये सभी साल 2022 से ही इस योजना को तैयार करने में जुटे थे।
मजदूरों के नाम पर अव्यवस्था फैलाने का था इरादा
इन दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि मानेसर से लेकर नोएडा और करावल नगर तक एक के बाद एक प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई गई थी। फरवरी में बड़े स्तर पर लेबर स्ट्राइक (मजदूर हड़ताल) की योजना थी। लेकिन पुलिस का कहना है कि इनका मकसद सिर्फ मजदूरों के मुद्दे उठाना नहीं था, बल्कि सड़कों को जाम करना और प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह ठप करना था।
गहरा है संगठनों का जाल
पुलिस की मानें तो इस पूरी साजिश की स्क्रिप्ट कई महीने पहले ही लिख दी गई थी। अलग-अलग संगठनों को जोड़कर एक संगठित नेटवर्क बनाया गया था, जिसका काम लोगों को भड़काना और आंदोलन की आड़ में हिंसा फैलाना था। पुलिस अब आदित्य आनंद से पूछताछ कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संगठनों की तलाश कर रही है।


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